मेरठः यूपी की योगी सरकार का 27,000 सरकारी स्कूल बंद करने का फरमान और 27,308 नई शराब की दुकानें खोलने के फैसले को लेकर आम आदमी पार्टी ने शिक्षा बनाम शराब की बहस को हवा दे दी है। इस नीतिगत फैसले के विरोध में आप के यूपी प्रभारी और राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने मेरठ में (Sanjay Singh In Meerut) एक जोरदार पैदल मार्च निकाला जिसमें सैकड़ों बच्चों और अभिभावकों ने हिस्सा लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।
संजय सिंह ने यूपी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि योगी सरकार शिक्षा को बर्बाद करने पर तुली हुई है। वर्तमान योगी सरकार बाबा साहेब अंबेडकर के उस सपने को रौंद देना चाहती है जिसमें उन्होंने शिक्षा को शेरनी का दूध कहा था।
उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की हालत पहले से निराशाजनक रही है। फिर भी राज्य के लाखों बच्चे इन्हीं स्कूलों पर निर्भर रहकर अपनी पढ़ाई करते हैं, खासकर गरीब, दलित, पिछड़े और ग्रामीण वर्ग के। लेकिन सरकारी आंकड़े बताते हैं कि प्राथमिक स्तर पर 1.93 लाख शिक्षकों के पद खाली हैं। माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में भी करीब 12,500 शिक्षक नहीं हैं। ऐसे हालात में सरकार स्कूलों को इसलिए बंद कर रही है कि वहां छात्रों की संख्या कम है। लेकिन यह संख्या घटने का कारण खुद सरकार की लापरवाही है, न तो पर्याप्त शिक्षक दिए गए, न ही मूलभूत सुविधाएं। कई स्कूलों में एकमात्र शिक्षक ही पूरे स्कूल का संचालन कर रहा है।
संजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि जब स्कूल बंद हो रहे थे, उसी दौरान सरकार ने 27,308 शराब की नई दुकानें खोलने का निर्णय लिया। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार को शिक्षा से अधिक चिंता शराब की बिक्री और उससे मिलने वाले राजस्व की है।
आम आदमी पार्टी ने पूरे प्रदेश में ‘स्कूल बचाओ आंदोलन’ (School Bachao Andolan) की शुरुआत कर दी है। पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को यह संदेश दे रहे हैं कि सरकार शिक्षा से दूर और शराब के ठेकों के करीब है। मधुशाला नहीं पाठशाला चाहिए जैसे नारे इस आंदोलन की पहचान बनते जा रहे हैं।
संजय सिंह ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द ही बंद स्कूलों को फिर से खोलने, शिक्षकों की भर्ती करने और विद्यालयों की मरम्मत की दिशा में कदम नहीं उठाया तो पार्टी इसे विधानसभा से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जोरदार तरीके से उठाएगी। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविध राज्य में, जहां आज भी करोड़ों बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हैं, वहां स्कूल बंद करना किसी अपराध से कम नहीं है। संजय सिंह और आम आदमी पार्टी का आंदोलन केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि एक सामाजिक चेतावनी हैकृअगर अभी नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ियाँ शिक्षा की जगह शराब की छाया में पलेंगी।
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