पीलीभीतः जनपद में स्मार्ट मीटर व्यवस्था लागू होने के बाद बिजली उपभोक्ताओं की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि बिल जमा करने के बावजूद भी कई घरों की बिजली सप्लाई अचानक कट जा रही है, जिससे लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। इस समस्या के चलते उपभोक्ताओं को न केवल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, बल्कि भीषण गर्मी में उन्हें अंधेरे और परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग द्वारा स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद से बिलिंग व्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ा गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि वे समय पर बिजली बिल जमा कर रहे हैं, इसके बावजूद “ऑटो कट” सिस्टम के चलते उनकी बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है। इससे घर-घर में हड़कंप मचा हुआ है और लोग अपनी शिकायत लेकर बिजली विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई इलाकों में उपभोक्ताओं ने पावर हाउस का घेराव भी किया। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। लोगों का कहना है कि बिजली बिल पहले के मुकाबले दोगुना तक आ रहा है और इसके बावजूद भी विभाग की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा। आम उपभोक्ताओं के घरों में 10-10 हजार रुपये तक के बिल आने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट बिगड़ गया है।
गर्मी की शुरुआत के साथ ही यह समस्या और अधिक गंभीर होती जा रही है। बिजली कटौती के कारण लोगों को पीने के पानी, कूलिंग और अन्य दैनिक जरूरतों में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में बुजुर्गों और बच्चों के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बन गई है।
इस पूरे मामले पर विद्युत विभाग के नकटादाना फीडर पर तैनात एसडीओ मनोज कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि पहले पोस्टपेड सिस्टम लागू था, लेकिन अब सभी उपभोक्ताओं के मीटर प्रीपेड कर दिए गए हैं। प्रीपेड सिस्टम के तहत उपभोक्ताओं को पहले से रिचार्ज कराना होता है। यदि बैलेंस समाप्त हो जाता है, तो बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो जाती है।
उन्होंने उपभोक्ताओं को सलाह दी कि वे अपने उपयोग से अधिक राशि का रिचार्ज रखें, ताकि बिजली कटने की समस्या से बचा जा सके। हालांकि, उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें इस नई व्यवस्था की पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। कुल मिलाकर, स्मार्ट मीटर व्यवस्था ने जहां पारदर्शिता लाने का दावा किया था, वहीं वर्तमान हालात में यह उपभोक्ताओं के लिए नई परेशानी का कारण बनती नजर आ रही है।
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