सोनभद्र: गीता जयंती समारोह समिति सोनभद्र द्वारा सोमवार को जयप्रभा मंडपम में “मानव जीवन में धर्मशास्त्र गीता की उपयोगिता” विषय पर विचार-गोष्ठी आयोजित की गई। वक्ताओं ने कहा कि गीता जीवन-संग्राम में शाश्वत विजय का क्रियात्मक प्रशिक्षण है। यह बाहरी नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चल रहे दैवी और आसुरी गुणों के संघर्ष का मार्गदर्शन करती है।
गोष्ठी में बताया गया कि भौतिक उपलब्धियाँ मनुष्य को स्थायी सुख नहीं दे सकतीं, गीता मनुष्य को उसकी आत्मिक संपत्ति से परिचित कराती है और शाश्वत परब्रह्म की ओर अग्रसर करती है। साहित्यकार पारस नाथ मिश्र ने कहा कि गीता मनुष्य का उससे वास्तविक साक्षात्कार कराती है कि वह परमात्मा का अंश है। डॉ. बी. सिंह ने कहा कि इन्द्रियों पर विजय और आत्मा का बोध ही वास्तविक सुख का स्रोत है। विषय प्रवर्तन करते हुए अरुण कुमार चौबे ने कहा कि संसारिक विषयों में स्थायी सुख नहीं, आत्मसाक्षात्कार में ही शांति है।
कार्यक्रम का संचालन पत्रकार भोलानाथ मिश्र ने किया। इस अवसर पर विजय कनोडिया, सी.पी. गिरि, रामानुज पाठक, गणेश पाठक, आलोक चतुर्वेदी, नरेंद्र पाण्डेय, विमल चौबे, राज कुमार और चंद्रकांत तिवारी उपस्थित रहे।
गीता जयंती के उपलक्ष्य में समारोह समिति ने गीता के अविनाशी योग के प्रचार-प्रसार में योगदान के लिए पाँच विभूतियों दीपक केसरवानी, ईश्वर विरागी, धनंजय पाठक, जटाशंकर पांडेय और चंद्र प्रकाश जायसवाल को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया।
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