विश्व प्रसिद्ध फड़ कला में जीवंत हुई हल्दीघाटी की गाथा, विवेक जोशी ने रंगों से उकेरा महाराणा प्रताप का शौर्य

खबर सार :-
इस कलात्मक विरासत को आगे बढ़ाने में विवेक जोशी के परिवार की नई पीढ़ी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उनके भाई विजय जोशी को भी हाल ही में राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त हो चुका है। उनकी एक विशेष हस्तनिर्मित चित्रकृति भजनलाल शर्मा द्वारा नरेंद्र मोदी को भेंट की गई थी, जिससे शाहपुरा की फड़ कला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।
विश्व प्रसिद्ध फड़ कला में जीवंत हुई हल्दीघाटी की गाथा, विवेक जोशी ने रंगों से उकेरा महाराणा प्रताप का शौर्य
खबर विस्तार : -

भीलवाड़ा: राजस्थान की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक चेतना का अद्भुत संगम एक बार फिर विश्वप्रसिद्ध शाहपुरा फड़ चित्रकला के माध्यम से सामने आया है। महाराणा प्रताप जयंती और हल्दीघाटी युद्ध की 450वीं वर्षगांठ के अवसर पर युवा फड़ कलाकार विवेक जोशी ने अपनी कलम और रंगों से इतिहास के उन अमर पलों को जीवंत कर दिया है, जो आज भी साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देते हैं। उनकी नवीनतम फड़ चित्रकृति में हल्दीघाटी युद्ध के प्रमुख प्रसंगों को पारंपरिक शैली में अत्यंत प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया गया है।

यह चित्रकृति केवल एक कलात्मक प्रस्तुति नहीं, बल्कि मेवाड़ के गौरव, महाराणा प्रताप के अदम्य साहस और राजस्थान की समृद्ध लोककला परंपरा का जीवंत दस्तावेज है। फड़ कला की विशेषता यह है कि इसमें चित्रों के माध्यम से संपूर्ण कथा का क्रमबद्ध वर्णन किया जाता है और विवेक जोशी ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हल्दीघाटी युद्ध की गाथा को रंगों में पिरोया है।

विवेक जोशी देश के प्रख्यात फड़ चित्रकार शांति लाल जोशी के सुपुत्र हैं। शांति लाल जोशी ने अपने जीवनकाल में फड़ कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी बनाई फड़ चित्रकृतियां देश-विदेश के संग्रहालयों, सांस्कृतिक संस्थानों, एयरपोर्ट और सरकारी भवनों में प्रदर्शित हैं। पिछले लगभग 700 वर्षों से उनका परिवार शाहपुरा में रहकर इस लोककला की परंपरा को संरक्षित और विकसित कर रहा है।

चित्र में जीवंत हुई हल्दीघाटी की संपूर्ण कथा

विवेक जोशी द्वारा तैयार इस विशेष फड़ चित्र में हल्दीघाटी युद्ध से जुड़े प्रमुख ऐतिहासिक प्रसंगों को क्रमवार दर्शाया गया है। चित्र की शुरुआत उस घटना से होती है, जब आमेर के राजा मान सिंह प्रथम ने महाराणा प्रताप को वार्ता के लिए आमंत्रित किया था। महाराणा प्रताप स्वयं न जाकर अपने पुत्र अमर सिंह को भेजते हैं। इस घटना को मान सिंह अपने अपमान के रूप में देखते हैं और इसके बाद युद्ध की भूमिका तैयार होती है।

इसके बाद चित्र में हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध अपने पूरे वैभव और वीरता के साथ उभरता है। एक ओर मेवाड़ की सेना का नेतृत्व करते हुए महाराणा प्रताप दिखाई देते हैं, जबकि दूसरी ओर विशाल मुगल सेना का नेतृत्व मान सिंह कर रहे हैं। युद्ध के सबसे चर्चित प्रसंग में महाराणा प्रताप अपने भाले से मान सिंह पर प्रहार करते दिखाई देते हैं। हालांकि मान सिंह के झुक जाने से प्रहार उन्हें नहीं लगता, लेकिन यह दृश्य महाराणा प्रताप की वीरता और युद्ध कौशल का प्रतीक बनकर उभरता है।

चित्र में महाराणा प्रताप के प्रिय अश्व चेतक की स्वामीभक्ति को भी अत्यंत भावपूर्ण ढंग से दर्शाया गया है। युद्ध के दौरान हाथी की सूंड में बंधी तलवार से चेतक गंभीर रूप से घायल हो जाता है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने स्वामी को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए संघर्ष करता है। चित्र में वह मार्मिक क्षण भी उकेरा गया है जब चेतक घायल अवस्था में पानी का दर्रा पार कर महाराणा प्रताप के प्राण बचाता है।

फड़ में एक अन्य भावनात्मक प्रसंग महाराणा प्रताप और उनके भाई शक्ति सिंह के मिलन का भी है। युद्ध के समय शक्ति सिंह मुगल पक्ष में थे, लेकिन अपने भाई की कठिन परिस्थिति देखकर उनका हृदय परिवर्तन होता है। अंततः दोनों भाइयों का मिलन केवल पारिवारिक संबंधों का प्रतीक नहीं, बल्कि सम्मान, त्याग और आत्मीयता का संदेश भी देता है।

नई पीढ़ी दे रही परंपरा को नई पहचान

विवेक जोशी का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल चित्र बनाना नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को भारतीय इतिहास, संस्कृति और राजस्थान की गौरवशाली लोककलाओं से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान चित्र अपेक्षाकृत छोटे आकार का है, जबकि इससे पहले वे हल्दीघाटी युद्ध पर 5 गुणा 12 फीट की विशाल फड़ भी तैयार कर चुके हैं, जिसमें युद्ध का विस्तृत चित्रण किया गया था।

शाहपुरा की फड़ कला सदियों से लोकदेवताओं, ऐतिहासिक घटनाओं और लोकगाथाओं को चित्रों के माध्यम से संरक्षित करती रही है। आज जब आधुनिकता के दौर में पारंपरिक कलाएं चुनौतियों का सामना कर रही हैं, तब विवेक जोशी जैसे युवा कलाकार इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उनकी यह नवीनतम कृति न केवल महाराणा प्रताप के शौर्य को श्रद्धांजलि है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का भी एक सशक्त प्रयास है।

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