झांसी: झांसी महानगर में टूरिस्ट परमिट की आड़ में अवैध रूप से बस संचालन का मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। आरोप है कि कुछ निजी बस ऑपरेटर अखिल भारतीय पर्यटक परमिट (ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट) का इस्तेमाल कर नियमों के विपरीत फुटकर सवारियां ढो रहे हैं और सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग ने ऐसे वाहनों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं।
जानकारी के अनुसार कई निजी बस संचालक शहर में बाकायदा कार्यालय खोलकर यात्रियों की सीटवार बुकिंग कर रहे हैं। इतना ही नहीं, विभिन्न स्थानों से फुटकर सवारियां बैठाकर उन्हें नियमित यात्री बसों की तरह एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा रहा है। जबकि टूरिस्ट परमिट पर संचालित वाहनों को निर्धारित नियमों के तहत केवल पर्यटन उद्देश्यों के लिए समूह यात्रियों को ले जाने की अनुमति होती है।
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने इस संबंध में सभी उप परिवहन आयुक्तों और संभागीय परिवहन अधिकारियों को पत्र जारी कर विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि विभाग के संज्ञान में आया है कि कुछ बसें और अन्य वाहन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीटवार बुकिंग कराकर स्टेज कैरिज (सार्वजनिक यात्री वाहन) की तरह संचालित किए जा रहे हैं, जो मोटर वाहन नियमों और परमिट की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है।
आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि विशेष चेकिंग अभियान के दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि टूरिस्ट परमिट पर चलने वाले वाहन अपने गृह राज्य से यात्रा प्रारंभ करें और वहीं यात्रा समाप्त करें। साथ ही यह भी देखा जाए कि कोई वाहन 60 दिनों से अधिक समय तक अपने गृह राज्य से बाहर संचालित न हो रहा हो। इसके अलावा वाहनों में व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस (वीटीडी) और इमरजेंसी पैनिक बटन की उपलब्धता भी अनिवार्य रूप से जांची जाएगी।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) हेमचंद्र गौतम ने बताया कि टूरिस्ट परमिट वाले वाहनों की जांच के आदेश प्राप्त हो चुके हैं। हालांकि हाल ही में चल रही पुलिस भर्ती प्रक्रिया के कारण विशेष अभियान को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि जल्द ही जिले में व्यापक स्तर पर विशेष चेकिंग अभियान शुरू किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग द्वारा इस प्रकार के वाहनों की नियमित जांच पहले से की जाती रही है। हर माह औसतन 20 से 25 बसों के खिलाफ परमिट उल्लंघन की कार्रवाई की जाती है। कई वाहन संचालक मौके पर ही जुर्माना जमा कर देते हैं, जबकि जुर्माना अदा नहीं करने वाले वाहनों को आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस के हवाले कर दिया जाता है।
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