फर्जी पैरामेडिकल कॉलेज चलाने वाले अभियुक्त को गिरफ्तार, पुलिस ने दिखाई सक्रियता

खबर सार :-
एक फ़र्ज़ी पैरामेडिकल कॉलेज खोलकर लोगों के साथ धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को गिरफ़्तार कर लिया गया है। गिरफ़्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया जा रहा है। इस कार्रवाई में सब-इंस्पेक्टर राकेश सिंह और सब-इंस्पेक्टर संजीव कुमार सहित पुलिस टीम ने अहम भूमिका निभाई।

फर्जी पैरामेडिकल कॉलेज चलाने वाले अभियुक्त को गिरफ्तार, पुलिस ने दिखाई सक्रियता
खबर विस्तार : -

शाहजहांपुर के थाना पुवायां पुलिस ने फर्जी पैरामेडिकल कॉलेज संचालित कर छात्रों को धोखाधड़ी का शिकार बनाने वाले गिरोह के एक वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चलाए जा रहे अपराध नियंत्रण अभियान के तहत की गई। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण और क्षेत्राधिकारी पुवायां के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक के नेतृत्व वाली पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना के आधार पर अभियुक्त को धर दबोचा।

छात्रों के कराए फर्जी प्रवेश

मामला उस समय प्रकाश में आया था जब पुवायां निवासी कमलदीप शुक्ला ने वर्ष 2024 में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उसे फर्जी पैरामेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेज में मैनेजर के पद पर नियुक्त कर छात्रों के फर्जी प्रवेश कराए गए और उनसे धन की वसूली की गई। जांच के दौरान कई गंभीर धाराओं में आरोप बढ़ाए गए।

पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में पहले भी मुख्य अभियुक्त बीके सिंह उर्फ बालकिशोर सिंह और संतोष पाठक को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा चुका है। इसी मामले में वांछित अभियुक्त श्याम शेरवानी को 31 मार्च 2026 की रात लगभग 10:40 बजे राजीव चौक, पुवायां से गिरफ्तार किया गया। अभियुक्त पर आरोप है कि वह गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर छात्रों को गुमराह करता था और अवैध रूप से धन अर्जित करता था।

कोर्ट के सामने किया पेश

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं और मानवाधिकार संबंधी निर्देशों का पालन किया। श्याम शेरवानी के खिलाफ थाना पुवायां में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के बाद अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक राकेश सिंह और उपनिरीक्षक संजीव कुमार सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनकी सक्रियता और तत्परता से यह सफलता संभव हो सकी। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों में गिरोह के सभी सदस्यों को पकड़ना प्राथमिकता है ताकि भविष्य में छात्रों को धोखाधड़ी से बचाया जा सके।

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