बिजोलिया/शाहपुरा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया कस्बे में कानून व्यवस्था को चुनौती देते हुए बदमाशों ने पत्रकारिता की आवाज को दबाने का दुस्साहस किया है। बुधवार रात को वरिष्ठ पत्रकार श्याम विजय पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने न केवल जानलेवा हमला किया, बल्कि उनके साथ लूटपाट कर सरेआम जान से मारने की धमकी भी दी। इस घटना के बाद से स्थानीय निवासियों और पत्रकार जगत में भारी आक्रोश व्याप्त है।
यह खौफनाक वारदात 1 अप्रैल 2026 की रात लगभग 9:10 बजे की है। जानकारी के अनुसार, पत्रकार श्याम विजय पंचायत चौक से अपना काम निपटाकर अपने घर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान एक बिना नंबर की सफेद हुंडई कार उनके पीछे लग गई। जैसे ही वह अपने घर के पास पहुंचे, कार सवार 3-4 बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर लाठी और लोहे के सरियों से लैस थे। उन्होंने बिना किसी बात के श्याम विजय पर ताबड़तोड़ हमला शुरू कर दिया। हमले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके सिर पर सरिये से वार किया गया, जिससे वह लहूलुहान होकर गिर पड़े।
हमलावरों का मकसद केवल मारपीट करना ही नहीं था। घायल पत्रकार ने बताया कि बदमाशों ने उनकी जेब में रखे करीब 11,000 रुपये नकद और गले से लगभग 30 ग्राम सोने की चेन लूट ली। जब श्याम विजय ने शोर मचाया, तो आसपास के लोग उनकी मदद के लिए दौड़े। भीड़ को अपनी ओर आते देख हमलावर मौके से फरार हो गए, हालांकि जल्दबाजी में वे अपनी एक लाठी वहीं छोड़ गए, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है।
पीड़ित पत्रकार द्वारा बिजोलिया थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में दो मुख्य आरोपियों के नाम सामने आए हैं। इनकी पहचान लक्ष्मी नारायण अहीर उर्फ कालू और योगेश अहीर के रूप में हुई है, जो आपस में सगे भाई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इनके साथ दो अन्य अज्ञात युवक भी शामिल थे। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों में से एक अवैध खनन गतिविधियों में लिप्त बताया जा रहा है, जबकि दूसरा नगर पालिका में संविदा कर्मी है। घटना के दौरान बदमाशों ने खुद को इलाके का "किंग" बताते हुए दावा किया कि उन्हें पुलिस और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने जाते-जाते धमकी दी, "तेरी मौत नजदीक है, मौका मिलते ही तुझे खत्म कर देंगे।"
पिछले कुछ महीनों से बिजोलिया कस्बे में आपराधिक ग्राफ तेजी से बढ़ा है। लूट, चोरी और राहजनी की घटनाएं अब यहां आम बात हो गई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। पिछले दो महीनों में हुई कई बड़ी वारदातों में पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं, जिससे आमजन में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।
पत्रकार श्याम विजय पर हुए इस कायराना हमले ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि इसे लोकतंत्र की स्वतंत्रता पर सीधे प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। इस जघन्य कृत्य के बाद पूरे जिले के पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश है और सभी ने एक स्वर में इस घटना की कड़ी निंदा की है। पत्रकारों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनकी मुख्य मांगों में आरोपियों की जल्द पकड़, पीड़ित पत्रकार और उनके परिवार को पुख्ता सुरक्षा प्रदान करना तथा इलाके में सक्रिय अवैध खनन माफिया और असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त अभियान चलाना शामिल है। यह घटना एक गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि अगर समाज का दर्पण कहे जाने वाले पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो आम आदमी की आवाज कौन उठाएगा? बिजोलिया का यह घटनाक्रम न केवल पुलिस के इकबाल पर गहरा सवाल उठाता है, बल्कि यह सोचने पर भी मजबूर करता है कि क्या अपराधी वाकई सिस्टम से बड़े हो गए हैं। अब सबकी नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इन रसूखदार हमलावरों को सलाखों के पीछे भेजकर न्याय का भरोसा कब तक बहाल करता है।
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