झांसी: लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड 3 में तैनात एक वरिष्ठ लिपिक को एंटी करप्शन टीम ने 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी लिपिक के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। यह मामला एक लंबी जांच और जालसाजी के बाद सामने आया। मामला थाना शाहजहांपुर के पसिया गांव के निवासी राजेंद्र कुमार से जुड़ा हुआ है। राजेंद्र कुमार के पिता घनश्याम, जो कि लोक निर्माण विभाग में बेलदार थे, 31 अक्टूबर 2025 को रिटायर हो चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद विभाग ने घनश्याम को लगभग 5.92 लाख रुपये का भुगतान किया था, लेकिन उनकी पेंशन और ग्रेच्युटी से जुड़ी राशि का भुगतान लंबित था। इस लंबित राशि के भुगतान के लिए लिपिक संतोष निरंजन ने 40,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
राजेंद्र कुमार ने पहले कई बार विभाग के दफ्तरों के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार संतोष निरंजन ने बिना रिश्वत के भुगतान करने से मना कर दिया। निरंतर हो रही परेशानियों के बाद, राजेंद्र कुमार ने एंटी करप्शन टीम से शिकायत की। इसके बाद एक रणनीति बनाई गई, और लिपिक के साथ लेनदेन को लेकर 20,000 रुपये अग्रिम और 20,000 रुपये काम के बाद देने की बात तय की गई। मंगलवार को राजेंद्र कुमार ने 20,000 रुपये की रकम लेकर लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड 3 के प्रशासनिक कक्ष में पहुंचे, जहां रिश्वत लेते हुए लिपिक संतोष निरंजन को एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ पकड़ा। टीम ने आरोपी लिपिक को तुरंत कोतवाली पुलिस स्टेशन ले जाकर उसके हाथ धुलवाए, जिससे रिश्वत की राशि में लगे रंग का सत्यापन किया गया। आरोपी के गिरफ्तार होने की सूचना मिलने के बाद विभाग के कई कर्मचारी भी कोतवाली पहुंचे, लेकिन मामले की संवेदनशीलता के कारण वे वापस लौट गए।
जांच में पता चला कि लिपिक संतोष निरंजन ने अपने कार्यालय को रिश्वतखोरी का अड्डा बना लिया था। वह खुलेआम रिश्वत लेता था, और उसके इस कार्य में कुछ अन्य अधिकारियों का भी हाथ था। पूछताछ के दौरान संतोष निरंजन ने दो अन्य अधिकारियों के नाम उजागर किए हैं, जिनके इशारे पर रिश्वत की राशि तय की गई थी। साथ ही, उसने कुछ अन्य कर्मचारियों के नाम भी बताए हैं, जो इस भ्रष्टाचार में शामिल हो सकते हैं। आरोपी लिपिक संतोष निरंजन बबीना थाना क्षेत्र के खैलार गांव का निवासी है और वर्ष 2017 से झांसी के लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड 3 में तैनात था। इस कार्यवाही में एंटी करप्शन टीम के निरीक्षक श्याम सिंह, प्रभारी निरीक्षक शादाब खान, जगदीश यादव, दिनेश कुमार सिंह, पुष्पेंद्र कुमार और अन्य सदस्य शामिल थे। यह कार्रवाई एंटी करप्शन टीम की सख्त कार्यवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके मजबूत इरादों का प्रतीक है। जांच जारी है, और अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ भी जल्द ही कार्रवाई हो सकती है।
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