ग्रामीणों ने पापड़ की तरह उखाड़ी नई सड़क, वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप

खबर सार :-
गाँव वालों ने PWD विभाग द्वारा कई लाख रुपये की लागत से बनाई गई उस सड़क को अपने हाथों से ही उखाड़ दिया, जो भगवंतपुर से कजरबोझी तक जाती है, गाँव वालों द्वारा अपने खाली हाथों से सड़क उखाड़ने का एक वीडियो वायरल हो गया है। इसके बाद विभाग पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों ने पापड़ की तरह उखाड़ी नई सड़क, वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप
खबर विस्तार : -

पीलीभीतः जिले के विकास खंड बरखेड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत भगवन्तापुर से जरबोझी तक बनाई गई सड़क इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा लाखों रुपये की लागत से तैयार इस सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने सड़क की खराब हालत को उजागर करते हुए अपने हाथों से इसे पापड़ की तरह उखाड़कर वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है।

घटिया सामग्री लगाने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का निर्माण महज सात दिन पहले ही पूरा हुआ था, लेकिन इतनी कम अवधि में ही सड़क की परत उखड़ने लगी। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती गई और घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। यही कारण है कि सड़क टिकाऊ नहीं बन सकी और उसकी गुणवत्ता बेहद कमजोर साबित हुई।

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ग्रामीण अपने हाथों से सड़क की परत को आसानी से उखाड़ रहे हैं, जिससे निर्माण कार्य की सच्चाई सामने आ रही है। इस घटना ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि अगर सड़क निर्माण में मानकों का पालन किया गया होता, तो इतनी जल्दी यह हालत नहीं होती।

निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। क्षेत्र में ऐसी कई सड़कों के वीडियो सामने आ चुके हैं, जिनमें निर्माण की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी, जैसे एक्सियन और जूनियर इंजीनियर (जेई), ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार मामले को लेकर केवल नोटिस जारी करने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। इससे ठेकेदारों के हौसले बुलंद हो रहे हैं और भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लग पा रही है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदारों व अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो और जनता के पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

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