Pilibhit Basmati Export Hub : पीलीभीत की बासमती अब दुनिया के 100 देशों में महकेगी, जितिन प्रसाद ने 'वीरांगना अवंती बाई लोधी' केंद्र की रखी नींव

खबर सार :-
Pilibhit Basmati Export Hub : केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने पीलीभीत को बासमती निर्यात का केंद्र बनाने की घोषणा की। टांडा बिजैसी में 7 एकड़ में बनेगा अत्याधुनिक 'वीरांगना अवंती बाई लोधी' प्रशिक्षण केंद्र, जिससे 100 देशों को होगा निर्यात।

Pilibhit Basmati Export Hub : पीलीभीत की बासमती अब दुनिया के 100 देशों में महकेगी, जितिन प्रसाद ने 'वीरांगना अवंती बाई लोधी' केंद्र की रखी नींव
खबर विस्तार : -

पीलीभीत: तराई की उपजाऊ मिट्टी और यहां की जलवायु जल्द ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पीलीभीत को एक नई पहचान दिलाने वाली है। केंद्रीय राज्य मंत्री और स्थानीय सांसद जितिन प्रसाद ने जनपद को बासमती निर्यात का एक बड़ा वैश्विक हब बनाने का रोडमैप तैयार कर लिया है। अब पीलीभीत का बासमती चावल केवल भारत की थाली तक सीमित न रहकर दुनिया के 100 से अधिक देशों के बाजारों की शोभा बढ़ाएगा।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए टांडा बिजैसी में सात एकड़ भूमि का औपचारिक हस्तांतरण कर दिया गया है। यहां बासमती निर्यात विकास फाउंडेशन (BEDF) के तत्वावधान में एक अत्याधुनिक केंद्र स्थापित होगा, जिसका नाम 'वीरांगना अवंती बाई लोधी बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र सह प्रदर्शन फार्म' रखा गया है।

 किसानों की आय और रोजगार के खुलेंगे द्वार

पूरनपुर हाईवे स्थित एक निजी होटल में पत्रकारों से वार्ता करते हुए जितिन प्रसाद ने कहा कि पीलीभीत का बासमती उत्पादन में एक गौरवशाली अतीत रहा है। उन्होंने कहा "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मेरा प्रयास है कि अपने मंत्रालय के माध्यम से क्षेत्र की जनता को कुछ विशेष सौगात दे सकूं। यह केंद्र न केवल पुरानी पहचान को वापस लाएगा, बल्कि किसानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खेती करने के लिए तैयार करेगा।"

इस केंद्र की स्थापना से स्थानीय युवाओं के लिए कृषि प्रौद्योगिकी और बीज उत्पादन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। एपीडा (APEDA) और BEDF मिलकर किसानों को बीज चयन से लेकर बाजार तक की पूरी चेन में तकनीकी और आर्थिक सहयोग प्रदान करेंगे।

लैब से लेकर म्यूजियम तक: केंद्र की अत्याधुनिक सुविधाएं

टांडा बिजैसी में स्थापित होने वाला यह महत्वाकांक्षी केंद्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा मान्यता प्राप्त होगा, जो इसकी तकनीकी प्रमाणिकता को वैश्विक स्तर पर मजबूती देगा। केंद्र की संरचना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहाँ लैब से लेकर म्यूजियम तक की सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी। यहाँ एक अत्याधुनिक उन्नत प्रयोगशाला बनाई जाएगी, जिसका मुख्य कार्य चावल की गुणवत्ता की बारीकी से जांच करना और कीटनाशक अवशेषों (पेस्टीसाइड रेजिड्यू) का परीक्षण करना होगा, ताकि निर्यात में कोई बाधा न आए।

इसके साथ ही, किसानों को आधुनिक खेती के गुर सिखाने के लिए एक विशाल प्रशिक्षण ऑडिटोरियम तैयार किया जाएगा, जहाँ वैज्ञानिक पद्धतियों और उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन पर कार्यशालाएं आयोजित होंगी। केंद्र का एक मुख्य आकर्षण यहाँ बनने वाला कृषि संग्रहालय होगा, जो बासमती के गौरवशाली इतिहास और इसकी विभिन्न दुर्लभ किस्मों को प्रदर्शित करेगा। जैविक खेती को धरातल पर उतारने के लिए यहाँ एक जैविक इनपुट स्टोर भी बनाया जाएगा, जहाँ किसानों को जैविक खाद और रसायनों के सुरक्षित विकल्प आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। यह पूरी परियोजना पीलीभीत के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलने का सामर्थ्य रखती है।

 जैविक खेती और रासायनिक अवशेष मुक्त उत्पादन पर जोर

मंत्री ने स्पष्ट किया कि वैश्विक बाजार में उन्हीं उत्पादों की मांग है जो रसायनों से मुक्त हों। इसलिए यह केंद्र विशेष रूप से 'ऑर्गेनिक फार्मिंग' पर केंद्रित रहेगा। जब पीलीभीत का चावल 'केमिकल रेजिड्यू फ्री' होगा, तभी वह निर्यात के कड़े मापदंडों पर खरा उतरेगा और किसानों को फसल के दोगुने दाम मिल सकेंगे। इस घोषणा के दौरान एमएलसी डॉ. सुधीर गुप्ता, विधायक बाबूराम पासवान (पूरनपुर), स्वामी प्रवक्ता नंद (बरखेड़ा), और विवेक वर्मा (बीसलपुर) सहित कई गणमान्य व्यक्ति और भारी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।

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