अलियापुर ग्राम पंचायत में विकास कार्य ठप, मोहन सीमेंट फर्म को भुगतान पर उठे सवाल

खबर सार :-
अलियापुर ग्राम पंचायत में विकास का कोई भी काम नज़र नहीं आता। सरकार द्वारा विकास कार्यों पर हर महीने लाखों रुपये लगातार खर्च किए जाने के बावजूद, ज़मीनी स्तर पर वास्तविक प्रगति लगभग न के बराबर है। वास्तव में, पूरे गाँव का सर्वेक्षण करने पर गंदगी के ढेर के अलावा और कुछ भी दिखाई नहीं देता।

अलियापुर ग्राम पंचायत में विकास कार्य ठप, मोहन सीमेंट फर्म को भुगतान पर उठे सवाल
खबर विस्तार : -

पीलीभीतः पीलीभीत जिले के विकास खंड ललौरीखेड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत अलियापुर में विकास कार्यों की स्थिति बेहद चिंताजनक नजर आ रही है। सरकार द्वारा गांवों के विकास के लिए हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है। ग्रामीणों का आरोप है कि भारी बजट के बावजूद गांव में विकास कार्य शून्य है और मूलभूत सुविधाओं की हालत बदतर बनी हुई है।

दूषित पानी से बढ़ा बीमारी का खतरा

गांव में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं, जिससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है और बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी हैंडपंपों के आसपास दूषित पानी भरा हुआ है, जिसे पीने के लिए मजबूर ग्रामीण स्वास्थ्य जोखिम झेल रहे हैं। साफ-सफाई के नाम पर ग्राम प्रधान और सचिव द्वारा नियमित रूप से मोटी धनराशि निकाली जाती है, लेकिन उसका कोई प्रभाव गांव की स्थिति में देखने को नहीं मिलता।

इसके अलावा ग्राम पंचायत में फर्जी भुगतान का मामला भी सामने आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अलियापुर से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित टिकरी गांव की “मोहन सीमेंट” फर्म के नाम पर लगातार भुगतान किया जा रहा है। यह सवाल खड़ा होता है कि जब स्थानीय स्तर पर सामग्री और सेवाएं उपलब्ध हो सकती हैं, तो इतनी दूर की फर्म को भुगतान क्यों किया जा रहा है।

निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। उनका आरोप है कि इस भुगतान प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा हुआ है और इसमें ग्राम प्रधान तथा सचिव की संलिप्तता हो सकती है।

गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र कमेटी गठित की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो गांव की स्थिति और भी खराब हो सकती है।

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