Jhansi: रेजिडेंट डॉक्टरों की एकजुटता की जीत, प्राचार्य ने ओपीडी समय में बदलाव लिया वापस

खबर सार :-
मेडिकल कॉलेज झांसी में रेजिडेंट डॉक्टरों की सक्रियता और संगठित प्रयास के चलते प्राचार्य ने 8 घंटे की ओपीडी व्यवस्था को वापस लेने और पहले की 6 घंटे की व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने का निर्णय लिया और साफ किया कि डॉक्टरों की सुरक्षा, कार्य क्षमता और संतुलित कामकाजी समय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

Jhansi: रेजिडेंट डॉक्टरों की एकजुटता की जीत, प्राचार्य ने ओपीडी समय में बदलाव लिया वापस
खबर विस्तार : -

झांसीः महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी के प्राचार्य डॉ. शिवकुमार अपने कई विवादास्पद आदेशों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने ओपीडी समय बढ़ाकर 8 घंटे करने का नया आदेश जारी किया, जो कि बसपा सरकार के समय लागू नियमों के आधार पर बनाया गया था। इस आदेश के तहत मेडिकल कॉलेज की ओपीडी सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगी और इसमें भोजन अवकाश का समय भी शामिल नहीं था।

हड़ताल की दी चेतावनी

इस बदलाव के विरोध में कॉलेज के जूनियर और रेजिडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल की चेतावनी दी। रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने कहा कि लगातार 8 घंटे की ओपीडी ड्यूटी के कारण चिकित्सकों का स्वास्थ्य और कामकाज प्रभावित होगा। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. जसप्रीत सिंह और वाइस प्रेसिडेंट डॉ. आदित्य बंसल ने कहा कि वे हड़ताल और धरने पर उतरने के लिए मजबूर होंगे यदि ओपीडी का समय पहले की तरह नहीं किया गया।

इस हड़ताल की चेतावनी के बाद प्राचार्य डॉ. शिवकुमार ने एसोसिएशन के नेताओं को अपने कार्यालय में बुलाया और विस्तृत वार्ता की। वार्ता के दौरान डॉक्टरों ने 8 घंटे की ओपीडी से जुड़ी परेशानियों, थकान, और चिकित्सकीय सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जानकारी दी।

वार्ता के बाद प्राचार्य ने आदेश में संशोधन किया और ओपीडी का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक कर दिया। इस बदलाव से ओपीडी का समय 6 घंटे हो गया और भोजन अवकाश भी शामिल कर दिया गया।

निर्णय की समीक्षा के निर्देश

प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि रेजिडेंट डॉक्टरों ने ओपीडी समय में वृद्धि से उत्पन्न समस्याओं को लेकर प्राचार्य को एक पत्र दिया था। पत्र पर विचार करने के बाद प्राचार्य ने समय वापस 6 घंटे करने का निर्णय लिया।

यह कोई पहला मामला नहीं है जब प्राचार्य के आदेश विवादों का कारण बने हों। इससे पहले उन्होंने एंटी-रेगिंग कमेटी के निर्णय की समीक्षा करने का आदेश दिया था, जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। इसके अलावा, कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे चिकित्सकों के नवीनीकरण पर रोक लगाने का आदेश भी विवादों में रहा। इस आदेश के खिलाफ 9 चिकित्सकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें कोर्ट ने चिकित्सकों के पक्ष में फैसला दिया। हालांकि, अभी तक चिकित्सकों की जॉइनिंग पूरी नहीं हो पाई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन और रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच बातचीत और समझ की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया है। इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि रेजिडेंट डॉक्टरों की एकजुटता और संगठित आवाज़ प्रशासनिक निर्णयों पर प्रभाव डाल सकती है।

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