झांसी: बुंदेलखंड के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र, महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज में इन दिनों स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। एक तरफ मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ अस्पताल में चिकित्सकों का भारी अभाव होता जा रहा है। संविदा डॉक्टरों के नवीनीकरण (Renewal) को लेकर मचे घमासान ने अब शासन स्तर तक हलचल पैदा कर दी है।
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. शिवकुमार द्वारा संविदा चिकित्सकों के वर्ष 2026-27 के अनुबंध नवीनीकरण पर रोक लगाए जाने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। इस निर्णय के खिलाफ प्रभावित डॉक्टरों ने गरौठा विधायक जवाहर राजपूत से गुहार लगाई थी। डॉक्टरों ने विधायक को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए अपने पक्ष में दस्तावेज सौंपे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक जवाहर राजपूत ने 28 फरवरी को चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर इस रोक को हटाने की मांग की थी। शासन ने इस पर त्वरित संज्ञान लिया और अपर मुख्य सचिव अमित घोष के निर्देश पर महानिदेशक से तीन दिनों के भीतर जवाब तलब किया गया।
चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग के अपर निदेशक आलोक कुमार ने 19 मार्च को कड़ा रुख अपनाते हुए प्रधानाचार्य को पत्र जारी किया। इसमें संविदा चिकित्सकों के कार्यकाल विस्तार से जुड़े सभी दस्तावेजों और आख्या को एक दिन के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। हालांकि, सूत्रों के अनुसार प्रधानाचार्य के अवकाश पर होने के कारण अभी तक शासन को आधिकारिक जवाब नहीं भेजा जा सका है।
महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयास फिलहाल रंग लाते नहीं दिख रहे हैं। हाल ही में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने रिक्त पड़े 75 महत्वपूर्ण पदों को भरने के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, जिसकी आवेदन प्रक्रिया सोमवार को समाप्त हो गई। हालांकि, भर्ती के परिणाम काफी निराशाजनक रहे हैं क्योंकि 75 पदों के विज्ञापन के सापेक्ष मात्र 25 से 30 चिकित्सकों ने ही संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर कार्य करने हेतु अपनी रुचि दिखाई है।
कॉलेज के मानव संसाधन ढांचे पर नज़र डालें तो यहाँ चिकित्सकों के कुल 162 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 60 पद सरकारी और 65 पद संविदा श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब आगामी 30 मार्च को प्रधानाचार्य द्वारा इन अभ्यर्थियों का साक्षात्कार (इंटरव्यू) लिया जाएगा। यह पूरी चयन प्रक्रिया राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कड़े मानकों और नियमों के तहत संपन्न की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आवेदकों की संख्या इसी तरह कम रही, तो रिक्त पदों को भरना एक बड़ी चुनौती साबित होगा, जिसका सीधा असर क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ना तय है।
महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों की कमी का गणित अब बेहद डरावने मोड़ पर पहुँच गया है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो स्थिति की गंभीरता साफ दिखाई देती है; इस साल जनवरी से अब तक लगभग 15 अनुभवी डॉक्टरों का अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) समाप्त हो चुका है, जिससे अस्पताल की सेवाएं सीधे तौर पर प्रभावित हुई हैं। विडंबना यह है कि कॉलेज में 37 पद पहले से ही रिक्त चल रहे थे, और अब नए पदों के खाली होने से व्यवस्था चरमराने की कगार पर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संविदा नवीनीकरण से जुड़ा प्रशासनिक विवाद समय रहते नहीं सुलझाया गया और नई नियुक्तियों की प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई गई, तो इसका खामियाजा सीधे तौर पर मरीजों को भुगतना पड़ेगा। झांसी ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों से आने वाले हजारों मरीजों को बिना उपचार के ही भटकने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
इस पूरे प्रकरण पर क्षेत्रीय राजनीति और शासन भी गंभीर है। गरौठा विधायक जवाहर राजपूत ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है, "हमने इस अत्यंत गंभीर विषय से प्रमुख सचिव को विस्तार से अवगत कराया है। किसी भी स्थिति में चिकित्सकों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शासन और हमारी पहली प्राथमिकता यही है कि मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कोई कमी न हो, ताकि आम जनता को सुलभ और बेहतर इलाज मिल सके।"
झांसी मेडिकल कॉलेज की यह स्थिति प्रशासनिक खींचतान और लचर प्रबंधन को दर्शाती है। यदि समय रहते रिक्त पदों को नहीं भरा गया और पुराने अनुभवी डॉक्टरों के अनुबंध को विस्तार नहीं मिला, तो बुंदेलखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सकती है।
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