जयपुरः उदयपुर राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की पीसीपीएनडीटी टीम ने गुरुवार को उदयपुर में सफल डिकॉय ऑपरेशन को अंजाम दिया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एमडी डॉ. अमित यादव के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में भ्रूण लिंग निर्धारण में शामिल एक महिला चिकित्सक एवं महिला दलाल को पकड़ा है। वहीं सेंटर से आवश्यक दस्तावेज सीज कर अन्य लोगों की भूमिका की पीबीआई थाना पुलिस जांच कर रही है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. हेमंत जाखड़ ने बताया कि राजस्थान की टीम को सूचना मिली थी कि उदयपुर जिले में एक दलाल गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड सेंटर्स में ले जाकर भ्रूण लिंग परीक्षण करवाती है। जिस पर टीम ने स्थानीय स्तर पर रेकी की तो सामने आया कि सूचना सही है। इस आधार पर पीसीपीएनडीटी (गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994) टीम ने एक योजना बनाकर मूलतः उत्तर प्रदेश निवासी एवं हाल उदयपुर में रहने वाली दलाल पूजा सागर से संपर्क साधा और गर्भवती महिला को डिकॉय के रूप में उसके पास भेजा। जहां उसने 35000 रुपए लिए और गर्भवती डिकॉय महिला को मुख्य डाकघर उदयपुर में स्थित अमर आशीष हॉस्पिटल एंड टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर में ले गई। इसके कुछ देर बाद गर्भवती महिला सहित दलाल बाहर निकली और गर्भवती महिला को धरा डायग्नोस्टिक सेंटर पर ले गई।यहां जांच के बाद दलाल पूजा गर्भवती को वापिस टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर पर ले गई।
यहां गर्भवती महिला का इशारा मिलने पर टीम मौके पर पहुंची और दलाल से पूछताछ की। जिस पर दलाल और गर्भवती ने बताया कि सेंटर में बुलाकर सेंटर संचालिका 60 वर्षीय डॉ. नीना सक्सेना ने खुद के हिस्से के 30 हजार रुपए मांगे और कहा कि पहले पैसे दो फिर ही नतीजा बताऊंगी। इसके बाद तीस हजार रुपए देने के बाद डॉ. नीना ने कोख में बेटा होना बताया और कहा कि भ्रूण ठीक है। इस दौरान गर्भवती महिला ने बाहर आकर टीम को इशारा किया, जिस पर टीम ने दलाल पूजा सागर पत्नी मोहित सागर और डॉ. नीना सक्सेना पत्नी अनंत सक्सेना निवासी केशव नगर उदयपुर व अमर आशीष हॉस्पिटल की संचालिका को हिरासत में लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए टीम जांच कर आगामी कार्रवाई कर रही है।
इस कार्रवाई से भ्रूण लिंग निर्धारण के अवैध धंधे में लिप्त लोगों के बीच हड़कंप मच गया। वरिष्ठ आईएएस एवं एनएचएम एमडी डॉ. अमित यादव ने कहा है कि वे लिंग चयन की बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास कर इस तरह की कार्रवाई जारी रखेंगे। यह कार्रवाई पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन और भ्रूण लिंग चयन को रोकने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। राजस्थान सरकार लंबे समय से लिंगानुपात में सुधार के लिए सख्त कदम उठा रही है और इस तरह के ऑपरेशन उसी दिशा में एक प्रभावी कदम है।
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