Kudwar Ration Scam : कुड़वार में सरकारी राशन प्रणाली पर बड़ा सवाल, जांच में कोटेदार की मनमानी उजागर

खबर सार :-
Kudwar Ration Scam :कुड़वार के मिठनेपुर गांव में सरकारी राशन घोटाले का खुलासा, जांच में कोटेदार पर घटतौली और कालाबाजारी के आरोप सही पाए गए, राशन वितरण पर रोक।

Kudwar Ration Scam : कुड़वार में सरकारी राशन प्रणाली पर बड़ा सवाल, जांच में कोटेदार की मनमानी उजागर
खबर विस्तार : -

सुलतानपुर: कुड़वार विकासखंड के ग्राम सभा मिठनेपुर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की साख उस समय कठघरे में आ गई, जब सरकारी राशन की कथित कालाबाजारी  (Kudwar Ration Scam) और घटतौली की शिकायत जांच में सही पाई गई। ग्रामीणों की शिकायत के बाद शुरू हुई प्रशासनिक जांच ने ऐसे तथ्य सामने रखे हैं, जिन्होंने न केवल कोटेदार की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विभागीय निगरानी व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर किया है।

गांव निवासी भूती निषाद द्वारा उपजिलाधिकारी सदर को दिए गए शपथ पत्र में आरोप लगाया गया था कि उचित दर विक्रेता ने जनवरी 2026 के लिए आवंटित खाद्यान्न उठान के बाद उसे लाभार्थियों में बांटने के बजाय खुले बाजार में बेच दिया। शिकायत के अनुसार, कई कार्डधारकों को या तो राशन मिला ही नहीं या फिर तय मात्रा से 4 से 5 किलो तक कम दिया गया। ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगवाकर राशन न देने और विरोध करने पर धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्ति विभाग ने संयुक्त जांच टीम का गठन किया। शुक्रवार को टीम गांव पहुंची, जिसमें पूर्ति निरीक्षक कुड़वार मयंक चतुर्वेदी, पूर्ति निरीक्षक लंभुआ वैभव श्रीवास्तव और पूर्ति लिपिक कृष्ण कुमार यादव शामिल थे। टीम ने मौके पर पहुंचकर कई लाभार्थियों के बयान दर्ज किए और स्टॉक की स्थिति, वितरण प्रक्रिया तथा व्यवहार संबंधी शिकायतों की गहन पड़ताल की।

जांच के दौरान सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि संबंधित कोटेदार ने अधिकारियों से संपर्क से बचते हुए न तो फोन उठाया और न ही मौके पर पहुंचा। अधिकारियों द्वारा कई बार बुलाए जाने के बावजूद उसकी गैरमौजूदगी ने संदेह को और गहरा कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जब कोटेदार प्रशासनिक अधिकारियों को भी नजरअंदाज कर सकता है, तो आम गरीब लाभार्थियों के साथ उसका व्यवहार कैसा होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। गांव की मोहनी देवी, बिमला, हरीलाल, प्रेमावती, रामदेव और हीरावती सहित अनेक कार्डधारकों ने एक स्वर में कहा कि उन्हें समय पर पूरा राशन नहीं मिला और शिकायत करने पर अपमानजनक भाषा का सामना करना पड़ा। इन बयानों के आधार पर जांच टीम ने उचित दर की दुकान पर नोटिस चस्पा कर दिया और स्टॉक का पूर्ण सत्यापन होने तक राशन वितरण पर तत्काल रोक लगा दी गई।

पूर्ति निरीक्षक मयंक चतुर्वेदी ने बताया कि जांच में कोटेदार का सहयोग न मिलना अपने आप में गंभीर मामला है। अब जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल यह प्रकरण पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार जांच केवल औपचारिकता बनकर नहीं रह जाएगी, बल्कि दोषी पाए जाने पर कोटेदार के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और लाइसेंस निरस्तीकरण जैसे ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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