भीलवाड़ा में 62 बीघा में बनेगा आधुनिक कोर्ट परिसर, भूमि पूजन से न्यायिक क्रांति की शुरुआत

खबर सार :-
भीलवाड़ा में न्याय का मार्ग अब और भी आसान, तेज़ और अधिक पारदर्शी होने जा रहा है। सांगानेर-तसवारिया में 62 बीघा ज़मीन पर बनने वाला यह अत्याधुनिक ज़िला न्यायालय परिसर, महज़ एक इमारत नहीं होगा, बल्कि आम लोगों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में आशा की एक नई किरण बनकर उभरेगा।

भीलवाड़ा में 62 बीघा में बनेगा आधुनिक कोर्ट परिसर, भूमि पूजन से न्यायिक क्रांति की शुरुआत
खबर विस्तार : -

भीलवाड़ाः न्यायिक ढांचे को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। सांगानेर-तस्वारिया क्षेत्र में 62 बीघा भूमि पर बनने वाले अत्याधुनिक जिला न्यायालय परिसर का रविवार को विधिवत भूमि पूजन किया गया। इस अवसर पर राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी सहित न्यायपालिका के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह परियोजना न केवल एक नया भवन है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था को अधिक तेज, पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सुविधाओं को दी जाएगी प्राथमिकता

भूमि पूजन समारोह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ, जिसने पूरे आयोजन को गरिमामय और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया। इस मौके पर राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति संजीव प्रकाश शर्मा ने न्यायिक प्रणाली में तकनीक के बढ़ते महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ई-कोर्ट, डिजिटल फाइलिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन सेवाएं न्याय प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं और इनका प्रभावी उपयोग आमजन को त्वरित न्याय दिलाने में सहायक होगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक का उपयोग केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि परिणाम देने वाला होना चाहिए, ताकि न्याय प्रक्रिया में अनावश्यक देरी को समाप्त किया जा सके। उनके अनुसार, नए न्यायालय परिसर में इन आधुनिक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनेगी।

समारोह के दौरान उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि यह परियोजना केवल एक भवन निर्माण नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती न्याय प्रणाली पर निर्भर करती है और जब न्याय सुलभ, सरल और समयबद्ध होता है, तभी समाज में विश्वास कायम रहता है।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सकारात्मक

नए न्यायालय परिसर में अत्याधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसमें पर्याप्त संख्या में न्यायालय कक्ष, अधिवक्ताओं के लिए व्यवस्थित चैंबर, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली, विशाल पुस्तकालय, आरामदायक प्रतीक्षालय और पर्याप्त पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इससे न केवल न्यायिक कार्यों में गति आएगी, बल्कि आम नागरिकों को भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

इस अवसर पर न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने न्यायिक क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सक्रिय उपस्थिति न्याय प्रणाली को अधिक संवेदनशील और समावेशी बना रही है। वहीं न्यायाधीश फरजांद अली ने युवा अधिवक्ताओं को मेहनत और अनुशासन के महत्व को समझने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एक सफल वकील बनने के लिए निरंतर अध्ययन और समर्पण आवश्यक है।

न्यायाधीश प्रभावीर भटनागर ने अधिवक्ताओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वे न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और समाज में कानून के शासन को मजबूत बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका होती है।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश अभय जैन ने बताया कि वर्तमान न्यायालय भवन वर्ष 1948 से संचालित हो रहा है और लंबे समय से स्थान की कमी की समस्या बनी हुई है। कई अदालतें मुख्य परिसर के बाहर संचालित हो रही हैं, जिससे कार्य में बाधाएं आती हैं। नए परिसर के निर्माण से इन समस्याओं का स्थायी समाधान होगा और न्यायिक कार्यप्रणाली में गुणात्मक सुधार आएगा।

कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

इस दौरान जिला अभिभाषक संस्था के अध्यक्ष उमेश सिंह राठौर ने कहा कि यह नया परिसर आने वाले समय में हजारों नागरिकों को बेहतर और पारदर्शी न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। समारोह में अभिभाषक संस्था की नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण भी कराया गया, जिसमें विभिन्न पदाधिकारियों ने अपने पद की जिम्मेदारी संभाली।

कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति भी रही, जिनमें शहर विधायक अशोक कोठारी, मांडल विधायक उदयलाल भड़ाना, सहाड़ा विधायक लाडूलाल पिटालिया और शाहपुरा विधायक ललाराम बैरवा शामिल थे। इसके अलावा भाजपा जिला अध्यक्ष, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित कई अधिकारी, अधिवक्ता और गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे।

कुल मिलाकर, भीलवाड़ा में बनने वाला यह नया न्यायालय परिसर न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल मामलों के निपटारे में तेजी आएगी, बल्कि आमजन को सुलभ और पारदर्शी न्याय मिलने की उम्मीद भी मजबूत होगी।

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