प्रॉपर्टी विवाद में दोस्त ही निकले कातिल, आजमगढ़ हत्याकांड का पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा, दो गिरफ्तार

खबर सार :-
आजमगढ़ हत्याकांड ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लालच और पैसों का विवाद रिश्तों को भी अपराध में बदल सकता है। पुलिस की वैज्ञानिक जांच, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और फॉरेंसिक टीम की मदद से इस जघन्य हत्या का खुलासा संभव हो सका। मामले में दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब अन्य संभावित कड़ियों और आर्थिक विवाद की गहराई से जांच कर रही है।
प्रॉपर्टी विवाद में दोस्त ही निकले कातिल, आजमगढ़ हत्याकांड का पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा, दो गिरफ्तार
खबर विस्तार : -

Azamgarh Property dispute murder case: आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र में हुए चर्चित हत्याकांड का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए मृतक के दो करीबी साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस जांच में सामने आया कि प्रॉपर्टी डीलिंग और पैसों के विवाद को लेकर युवक की हत्या की गई थी। आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने के बाद घटना को दूसरा रूप देकर अन्य लोगों को फंसाने की भी कोशिश की थी, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया।

पुलिस के अनुसार, जहानागंज थाना क्षेत्र के कोढ़वा गांव निवासी सुनील कुमार ने 21 मई को मुबारकपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसका भाई सुशील Kumar 20 मई की रात अपने साथी उमाशंकर उर्फ पिन्टू यादव के साथ चार पहिया वाहन से एक निमंत्रण कार्यक्रम में गया था। देर रात सूचना मिली कि रानीपुर गांव जाने वाले मार्ग पर हनुमान मंदिर के पास कुछ लोगों ने सुशील कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी है। शिकायत में पंकज सिंह उर्फ सोनू सिंह, अवनीश यादव उर्फ बबलू यादव और एक अज्ञात व्यक्ति पर हत्या का आरोप लगाया गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने हत्या और एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

सीडीआर और फॉरेंसिक जांच से बदला केस का पूरा रुख

पुलिस ने शुरुआती जांच में घटनास्थल की वीडियोग्राफी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और सीन रीक्रिएशन का सहारा लिया। जांच के दौरान पुलिस को मृतक के साथ मौजूद उमाशंकर उर्फ पिन्टू यादव और वीरेंद्र उर्फ बिन्दू यादव की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सठियांव रेलवे स्टेशन के पास से उमाशंकर यादव उर्फ पिन्टू को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से 400 रुपये बरामद किए गए। वहीं दूसरी कार्रवाई में वीरेंद्र उर्फ बिन्दू यादव को कोढ़वा-अचलपार मार्ग स्थित मंदिर के पास से पकड़ा गया। उसके पास से 150 रुपये बरामद हुए। पुलिस ने आरोपी वीरेंद्र की निशानदेही पर झाड़ियों में छिपाकर रखा गया 315 बोर का तमंचा और दो जिंदा कारतूस भी बरामद किए। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी तमंचे का इस्तेमाल हत्या में किया गया था।

नशे की हालत में था सुशील, सुनसान रास्ते पर मारी गोली

पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए। पुलिस के मुताबिक, हत्या की पूरी साजिश पहले से रची गई थी। 20 मई की रात उमाशंकर यादव ने वीरेंद्र यादव को रानीपुर बुलाया था। उस समय वाहन में पहले से सुशील कुमार मौजूद था और वह नशे की हालत में था। आरोपियों ने सुनसान रास्ते पर जमीन के लेनदेन और पैसों के विवाद को लेकर सुशील कुमार से बहस शुरू की। इसी दौरान उमाशंकर ने तमंचे से सुशील कुमार के सिर में गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए वाहन के शीशे पर भी फायर किया, ताकि घटना किसी बाहरी हमले जैसी लगे। इसके बाद तमंचा वीरेंद्र यादव को छिपाने के लिए दे दिया गया।

पुलिस अधीक्षक बोले-आरोपियों ने रची थी बड़ी साजिश

आजमगढ़ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पांच दिन पहले एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या किए जाने की सूचना मिली थी। मामले के खुलासे के लिए पुलिस की कई टीमों को लगाया गया था। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिको-लीगल रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हो गया कि हत्या मृतक के साथ मौजूद लोगों ने ही की थी। आरोपियों ने घटना को दूसरा रूप देकर अन्य लोगों को फंसाने की साजिश रची थी, लेकिन वैज्ञानिक जांच के जरिए पुलिस ने पूरे षड्यंत्र का खुलासा कर दिया।

 

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