Sanjay Raut Statement:  संजय राउत का बागी सांसदों पर हमला, बोले- सत्ता के लिए दल-बदल लोकतंत्र और राजनीतिक नैतिकता के लिए खतरा

खबर सार :-
शिवसेना के राज्यसभा सांसद और मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्य रुप से धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर और हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर की कड़ी निंदा की है।
Sanjay Raut Statement:  संजय राउत का बागी सांसदों पर हमला, बोले- सत्ता के लिए दल-बदल लोकतंत्र और राजनीतिक नैतिकता के लिए खतरा
खबर विस्तार : -

Sanjay Raut Statement: शिवसेना पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने पार्टी छोड़ने वाले बागी सांसदों की आलोचना की है। उन्होंने सांसदों के बगावत को लेकर भाजपा और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर हमला बोला है। पार्टी के स्थापना दिवस के दौरान शांत रहने के बाद अब शिवसेना प्रवक्ता बागी सांसदों पर बरसते नजर आ रहे हैं। 

Sanjay Raut Statement: राजनीतिक लाभ और सत्ता का दबाव- संजय राउत

अपने साप्ताहिक स्तंभ 'रोखठोक' में संजय राउत ने आरोप लगाते हुए कहा है कि पार्टी छोड़ने वाले लिस्ट में मौजूद सांसदों का अपना वैचारिक मत नहीं है बल्कि राजनीतिक लाभ और सत्ता के दबाव का नतीजा है। 'सामना' में प्रकाशित लेख में राउत ने दावा किया है कि सांसदों को पार्टी से अलग-थलग करने के लिए काफी बड़े स्तर पर राजनीतिक खरीद-फरोख्त और करोड़ों की सौदेबाजी शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि विकास कार्यों और क्षेत्रीय हितों का नाम लेकर दल-बदल राजनीति को सही ठहराने की कोशिश की जा रही है, जबकि इसके पीछे की सच्चाई राजनीतिक लाभ से जुड़ा है। संजय राउत के अनुसार, शिवसेना के टिकट कार्यकर्ताओं की मेहनत और उद्धव ठाकरे की अगुवाई में मिले जनसमर्थन के आधार पर निर्वाचित हुए सांसदों का पार्टी से अलग होना मतदाताओं के साथ विश्वासघात है। 

Sanjay Raut Statement: दल-बदल की राजनीति की तुलना गद्दार मीर से की

संजय राउत ने अपने लेख दल-बदल की राजनीति की तुलना इतिहास के चर्चित गद्दार मीर जाफर, ब्रूटस, ज्युडस और क्विसलिंग से की है। उनका कहना है कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में दल-बदल और राजनीतिक निष्ठा बदलने की मंशा को बगावत का नाम दिया जा रहा है, जबकि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक नैतिकता के विपरीत है। संगठन और विचारधारा के सिद्धांतों को नजरअंदाज कर केवल सत्ता के लाभ-हानि के हिसाब से फैसले लेना लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर सकता है।

Sanjay Raut Statement: आयाराम-गयाराम की राजनीति- संजय राउत

संजय राउत का आरोप है कि देश में आयाराम-गयाराम की राजनीति तुल पकड़ रही है, जिससे राजनीतिक नैतिकता और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर असर पड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि सत्ता प्राप्त करने या उसे बनाए रखने के लिए जनप्रतिनिधियों को अपने पक्ष में करने की कोशिश लोकतंत्र की मजबूती के लिए एक बड़ी चुनौती है। बता दें कि इस बार शिवसेना की 60वीं स्थापना दिवस थी। इसके उपलक्ष्य में उन्होंने बागी सांसदों की आलोचना की और कहा कि शिवसेना केवल एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि विचार और संघर्ष की परंपरा है। 

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