Keir Starmer Quits: ब्रिटेन की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री Keir Starmer ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है, जिससे देश की राजनीतिक व्यवस्था में नई हलचल शुरू हो गई है। स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि वह लेबर पार्टी के नए नेता और अगले प्रधानमंत्री के चयन तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। उनके इस्तीफे के साथ ही ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब लेबर पार्टी के अगले चेहरे पर टिक गई है।
स्टार्मर का यह फैसला ऐसे समय आया है जब उनकी लोकप्रियता में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही थी और पार्टी के भीतर भी उनके नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे थे। हाल के महीनों में कई सांसदों और वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी को आगामी चुनावों में संभावित नुकसान से बचाने के लिए नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत जताई थी।
ब्रिटिश मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यूके की विदेश सचिव येवेट कूपर ने निजी तौर पर स्टार्मर को पद छोड़ने की सलाह दी थी। बताया जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को लगने लगा था कि मौजूदा नेतृत्व के साथ अगले आम चुनाव में जीत हासिल करना मुश्किल होगा। अपने संबोधन में स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की राय को ध्यान से सुना है और उसी का सम्मान करते हुए यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि उनके सभी फैसलों का उद्देश्य हमेशा देशहित रहा और उन्होंने हर परिस्थिति में ब्रिटेन को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा, “मैंने पार्टी की आवाज सुनी है और मैं उसका सम्मान करता हूं। लोकतंत्र में नेतृत्व का अर्थ केवल निर्णय लेना नहीं, बल्कि समय आने पर जिम्मेदारी स्वीकार करना भी है।”

महज दो वर्ष पहले कीर स्टार्मर को ब्रिटेन की राजनीति का सबसे सफल नेता माना जा रहा था। उनके नेतृत्व में लेबर पार्टी ने ऐतिहासिक चुनावी जीत दर्ज करते हुए 174 सीटों के बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी। यह जीत 14 वर्षों बाद लेबर पार्टी की सत्ता में वापसी का प्रतीक बनी थी। उस समय स्टार्मर को एक ऐसे नेता के रूप में देखा गया था जिसने लंबे समय से संकट झेल रही लेबर पार्टी को नया जीवन दिया। उन्होंने पार्टी की छवि सुधारने, संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच विश्वास बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि सत्ता में आने के बाद परिस्थितियां तेजी से बदलीं और सरकार को कई विवादों का सामना करना पड़ा। यही विवाद आगे चलकर उनके नेतृत्व पर भारी पड़ते दिखाई दिए।
स्टार्मर सरकार के कार्यकाल में कई ऐसे फैसले सामने आए जिन्होंने जनता और पार्टी दोनों के बीच असंतोष पैदा किया। बुजुर्गों के लिए विंटर फ्यूल भुगतान योजना में बदलाव और वॉशिंगटन में पीटर मैंडेलसन को ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त करने जैसे निर्णयों पर व्यापक आलोचना हुई। इसके अलावा कई नीतिगत यू-टर्न ने भी सरकार की विश्वसनीयता को प्रभावित किया। विपक्ष ने इन फैसलों को नेतृत्व की कमजोरी बताया, जबकि पार्टी के अंदर भी कई सांसद खुलकर नाराजगी जताने लगे। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बदलती नीतियों और विवादित निर्णयों ने स्टार्मर की मजबूत और निर्णायक नेता की छवि को नुकसान पहुंचाया।
हाल के जनमत सर्वेक्षणों में लेबर पार्टी का प्रदर्शन लगातार कमजोर दिखाई दे रहा था। दूसरी ओर रिफॉर्म यूके पार्टी का जनाधार बढ़ता नजर आया। कई राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में रिफॉर्म यूके को बढ़त मिलने से लेबर नेतृत्व की चिंता बढ़ गई। रिफॉर्म यूके के नेता नाइजल फैराज की लोकप्रियता में वृद्धि भी लेबर पार्टी के लिए चुनौती बन गई। पार्टी के कई सांसदों को आशंका थी कि यदि समय रहते नेतृत्व परिवर्तन नहीं किया गया तो अगले चुनाव में सत्ता हाथ से निकल सकती है। इसी पृष्ठभूमि में स्टार्मर पर दबाव बढ़ता गया और अंततः उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया।

स्टार्मर के इस्तीफे के बाद जिस नाम की सबसे अधिक चर्चा हो रही है, वह एंडी बर्नहैम हैं। 56 वर्षीय बर्नहैम वर्तमान में लेबर पार्टी के सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। हाल ही में उत्तरी इंग्लैंड के मेकरफील्ड उपचुनाव में उनकी शानदार जीत ने उनकी राजनीतिक ताकत को और मजबूत किया है। उन्होंने ऐसे समय में जीत हासिल की जब लेबर पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष कर रही थी। बर्नहैम पहले ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रह चुके हैं और क्षेत्रीय विकास के मॉडल को लेकर उनकी काफी प्रशंसा होती रही है। उनके समर्थक उनके आर्थिक दृष्टिकोण को “मैनचेस्टरिज्म” नाम देते हैं।
बर्नहैम का मानना है कि ब्रिटेन की आर्थिक समस्याओं का समाधान केवल लंदन-केंद्रित विकास मॉडल में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने में है। उनका “मैनचेस्टरिज्म मॉडल” मैनचेस्टर के तेज आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और रोजगार सृजन के अनुभवों पर आधारित है। समर्थकों का दावा है कि यदि इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाए तो क्षेत्रीय असमानता कम हो सकती है और आर्थिक विकास को नई गति मिल सकती है। यही कारण है कि पार्टी के भीतर उन्हें भविष्य के नेता के रूप में देखा जा रहा है।
इस्तीफे की घोषणा करते हुए कीर स्टार्मर भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनना उनके जीवन का सबसे गौरवपूर्ण क्षण था। उन्होंने याद दिलाया कि जब उन्होंने लेबर पार्टी की कमान संभाली थी, तब पार्टी राजनीतिक और नैतिक संकट से गुजर रही थी। स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने पार्टी से यहूदी-विरोधी सोच को खत्म करने, राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर जनता का भरोसा लौटाने तथा एक मजबूत और जिम्मेदार राजनीतिक संगठन तैयार करने का प्रयास किया। उनके अनुसार उनका उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं बल्कि ब्रिटेन को बेहतर बनाना था।
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