Exit poll result:एक्जीट पोल का संकेत, क्या वर्तमान एमपी के हाथ से फिसल जाएगी कुर्सी

खबर सार :-
बंगाल से लेकर केरल तक जारी हुए एक्जिट पोल के रिजल्ट ने कई बड़े संकेत दिए हैं, लेकिन फिलहाल चर्चा इस बात की है कि क्या वर्तमान के एमएलए अपनी सीट बचा पाने में कामयाब हो पायेंगें या कुछ बड़ा बदलाव होने वाला है।

Exit poll result:एक्जीट पोल का संकेत, क्या वर्तमान एमपी के हाथ से फिसल जाएगी कुर्सी
खबर विस्तार : -

Exit poll result2026: इस वक्त बंगाल से लेकर केरल, तमिलनाडु और असम के सियासी गलियारों में सीट को लेकर काफी हलचल मची हुई। अलग-अलग एक्जिट पोल के नतीजों ने सबकी चिंता बढ़ा दी है। कई एक्जिट पोल ने बंगाल में बीजेपी को बढ़त के साथ आगे रखा, तो वहीं केरल में सत्ता परिवर्तन को लेकर कई तरह की बातें की जा रही हैं। 

एक्जिट पोल

इस समय केरल,, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, जैसे राज्यों में कई बड़ें डामाडोल की संभावनाएं दिख रही हैं। कई एक्जिट पोल ने बंगाल में बीजेपी की बढ़त का आंकड़ा पेश किया, तो वहीं केरल में सत्ता परिवर्तन की बातें काफी तुल पकड़ रही हैं। हालांकि असम और तमिलनाडु में मौजूदा विधायक अपनी सीट बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि एक्जिट पोल की रिजल्ट का वर्तमान विधायकों पर क्या प्रभाव डालेगा। अगर  विधानसभा के पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें कुछ ऐसे विधायक रहें हैं, जिन्हें जबरजस्त बढ़त मिली है। भले ही  उनकी सरकार को काफी चुनौती का सामना करना पड़ा हो, लेकिन वो अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहे हैं। लेकिन वहीं पश्चिम बंगाल की बात करें तो यहां एंटी इमकंबेसी देखने को मिलती है, लेकिन इसे आखिरी निर्णय नहीं मान सकते हैं। साल 2011 के चुनाव में लगभग 42 प्रतिशत विधायक अपना सीट बचाने में सफल रहे थे।

पिछले साल का आंकड़ा

साल 2016 में यह आंकड़ा 72 फीसदी तक बढ़ गया था, जबकि वर्ष 2021 में इसका आंकड़ा थोड़ा घटा था, जो कि 63 प्रतिशत तक था। अगर इन तीनों परिणामों को मिलाकर देखें तो लगभग 61 प्रतिशत विधायक अपनी सीट बचाने में सफल रहे थे। बात करें केरल की तो यहां हमेशा से बढ़त रही है, मौजूदा विधायक अपनी सफलता की कुर्सी बचाने में बरकरार रहे हैं।

2011 में 78 फीसदी

बात करें पिछले कुछ सालों की तो इसमें साल 2011 में 78 फीसदी, साल 2016 में 76 फीसदी और साल 2021 में 84 फीसदी विधायक अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहे थे।इन आंकड़ों को मद्देनजर रखते हुए सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2026 में भी एक्जिट पोल के नतीजे वर्तमान एमएलए को उनकी कुर्सी बचाने में मदद करती है या हालात कुछ और ही होंगें।

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