भाजपा का ड्रीम प्रोजेक्ट पूरा: अंग-बंग-कलिंग पर भगवा शासन

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अमित शाह के “अंग-बंग-कलिंग” बयान के संदर्भ में नरेंद्र मोदी नेतृत्व वाली भाजपा के पूर्वी भारत में राजनीतिक विस्तार, पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और गंगा तटवर्ती राज्यों में प्रभाव को विश्लेषित किया गया है। लेख में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और समकालीन राजनीतिक परिप्रेक्ष्य का समावेश है।

भाजपा का ड्रीम प्रोजेक्ट पूरा: अंग-बंग-कलिंग पर भगवा शासन

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम आने के पूर्व देश के गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अमित शाह ने कोलकाता में मीडिया से बात करते हुये कहा था कि आजादी के बाद पहली  बार प्राचीन भारत के अंग-बंग-कलिंग तक भाजपा का शासन स्थापित होगा। गृहमंत्री का यह दावा चुनाव चर्चा और एग्जिट पोल की बहस में दब कर रह गया था। दरअसल सत्ता में आने के बाद से ही भाजपा का सपना अंग-बंग-कलिंग क्षेत्र में शासन करने  का था जिसके लिये प्रधानमंत्री की टीम एक अर्से से प्रयास कर रही थी। पश्चिम बंगाल में ममता को सत्ता से बाहर करने के साथ ही न केवल भाजपा का ड्रीम प्रोजेक्ट पूरा हुआ बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की मां गंगा के प्रति अटूट आस्था भी फलीभूत होती दिख रही है। अब गंगा के उद्गम स्थल गंगोत्री से गंगासागर तक भगवा फहर गया।

अंग-बंग-कलिंग

केन्द्र में सत्ता संभालने के बाद से ही भाजपा प्राचीन भारत के तीन प्रमुख सामा्रज्यों अंग,बंग और कलिंग पर शासन करने का सपना देख रही थी। इन प्राचीन सामराज्यों का धार्मिक,सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व है। अंग सामराज्य के बारे में कहा जाता है कि महाभारत में वर्णित हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन ने अपने मित्र कर्ण को  अंग राज्य उपहार में दिया था। अंग राज्य भले ही मुंगेर और भागलपुर तक सीमित रहा हो लेकिन आज के संदर्भ सम्पूर्ण बिहार को अंग राज्य माना जाता है। भारतीय इतिहास के अनुसार यह राज्य बाद में मौर्य सामाज का भी हिस्सा बना था। भाजपा सदैव से ही बिहार में सत्ता पाना चाहती थी इसके लिये कुछ अवसर भी आये लेकिन सत्ता के लिये गठबंधन धर्म की मर्यादा आड़े आयी और पार्टी ने सत्ता के बजाय धर्म का चयन किया। 2025 के चुनाव के बाद ऐसा घटना चक्र आया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केन्द्र की राजनीति में चले गये और भाजपा नेता सम्राट चैधरी ने मार्च 2026 में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 

कलिंग में फहरा भाजपा का परचम

कलिंग शब्द आते ही सबको सम्राट अशोक की बरबस याद आती है। महान वीर पराक्रमी सम्राट अशोक ने अपने साम्राज्य विस्तार के लिये शक्तिशाली कलिंग राज्य पर आक्रमण किया। भीषण नरसंहार ,रक्तपात के बाद अशोक को विजय मिली लेकिन युद्ध के मैदान का हृदय विदारक दृश्य देखकर उसने भविष्य में युद्ध न करने और मानवता की रक्षा का संकल्प लिया था। तत्कालीन कलिंग राज्य  आधुनिक भारत का उड़ीसा राज्य है। उड़ीसा में लगभग ढ़ाई दशक तक बीजू जनता दल का एक छत्र साम्राज्य था। किसी विरोधी दल को राज्य में सत्ता का अवसर नहीं मिल रहा था। ऐसे में मोदी और शाह की टीम ने पार्टी के न केवल संगठन को मजबूत किया अपितु कार्यकर्ताओं के मनोबल को लगातार बढ़ाया और 2024 के विधानसभा चुनाव में 78 सीट जीत कर स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाई। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी 20 सीटें जीतकर नवीन पटनायक के घमंड को तोड़ दिया।

बंग से दीदी की विदाई

मात्र दो वर्षो में पहले कलिंग फिर अंग में भगवा फहरने के बाद पार्टी का पूरा जोर पश्चिम बंगाल में तृणमूल को सत्ता से बेदखल करने पर था। भाजपा के लिये पश्चिम बंगाल कई मामलों में महत्वपूर्ण है। सबसे पहले तो यह राज्य जनसंघ के सह संस्थापक ड़ा श्यामा प्रसाद मुखर्जी का गृह राज्य है। भाजपा को यह बात एक लम्बे अर्से से कचोटती रही है कि वह अपने आदर्श पुरुष के गृह राज्य में सत्ता से दूर है। दूसरा जब भी देश में घुसपैठियों की बात होती तो सबसे पहले प. बंगाल की संलिप्तता सामने आती लेकिन जब कार्यवाई की बात आती तो ममता सरकार उनकी ढाल बनकर कर खड़ी हो जाती। 

नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमायें राज्य से सटी होने के बाद भी सरकार का सामरिक दृष्टि से बेपरवाह होना केन्द्रीय सुरक्षा ऐजेंसियों के लिये समस्या पैदा कर रहा था। भाजपा कोलकाता को उसका पुराना आर्थिक वैभव दिलाने के लिये प्रयासरत रही लेकिन सरकार हर विकास योजनाओं में बाधा डालती आ रही थी। इसीलिये पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं ने आम मतदाताओं में भाजपा की स्वीकार्यता के लिये ऐसा कार्यक्रम चलाया कि पिछले 15 वर्षो से सत्तासीन ममता बनर्जी को राज्य में दहाई के आंकड़े पर संतोष करना पड़ा। भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल करके बंग में सत्तासीन होने का अपना सपना पूरा कर लिया।

फलीभूत होती मोदी की गंगा में आस्था

एक ओर भाजपा का ड्रीम प्रोजेक्ट पूरा होने का मामला गहन चर्चा का बिन्दु बना हुआ है तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री की फलीभूत होती गंगा में भी आस्था चर्चा में है।  लोकसभा चुनाव 2014 में वाराणसी संसदीय सीट से नामांकन करने आये नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि ‘न मैं आया हूं, न मुझे भेजा गया है, मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है ’। मां गंगा के प्रति समर्पण ,अटूट श्रद्धा और विश्वास को प्रगट करता उनका यह वाक्य लोगों के दिलो-दिमाग  में गहराई तक उतर गया था। यद्यपि सेकुलर विरोधियों ने उनकी इस आस्था का खूब मजाक बनाया लेकिन मां गंगा से बधीं उनकी आस्था की यह डोर सत्ता में आने के बाद भी मजबूत होती गई। काशी से इतर प्रयागराज में कुंभ और महाकुंभ के अवसर पर मां गंगा के प्रति उनकी अटूट आस्था को देखकर पूरा विश्व चकित हुआ। अब मात्र 12 वर्षो में मां गंगा के प्रति उनकी आस्था का परिणाम है या संयोग कि आज गंगा के उद्गम स्थल गंगोत्री से गंगासागर तक के चारों प्रमुख राज्यों में भगवा फहर रहा है। पतित पावनी गंगा अपने उद्गम स्थल गंगोत्री जो उत्तराखंड़ में है, से निकलकर उत्तर प्रदेश से होती हुयी बिहार राज्य में प्रवेश करती हैं। बिहार के बाद गंगा झारखंड़ सीमा को छूकर पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है । पश्चिम बंगाल में मां गंगा अपनी यात्रा पूरी करके गंगासागर दीप के पास समुद्र में विलीन हो जाती हैं। 

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