दुनिया का सबसे खतरनाक देश बनता पाकिस्तान

Photo of writer Mritunjay Mritunjay Dixit
अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण पाकिस्तान को गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे ईंधन और गैस की कमी, आंशिक लॉकडाउन और स्कूलों को बंद करने जैसी स्थितियाँ पैदा हो गई हैं। बढ़ती कीमतें जनता के गुस्से को और भड़का रही हैं, जबकि इसकी विदेश नीति की गलतियाँ, UAE को कर्ज चुकाने का दबाव और आतंकवादी समूहों को दिया जा रहा समर्थन देश पर और अधिक बोझ डाल रहे हैं।

दुनिया का सबसे खतरनाक देश बनता पाकिस्तान

अमेरिका -इजराइयल और ईरान युद्ध के चलते ईरान भले ही पाषाण युग में न पहुंचे किंतु इस युद्ध को रोकने के लिए मध्यस्थता का दावा करने वाला पाकिस्तान जरूर पाषाण युग में पहुंच सकता है। खाड़ी युद्ध के कारण पाकिस्तान में  हुई पेट्रोल- डीजल व रसोई गैस की किल्लत के चलते आंशिक लॉकडाउन लगाना पड़ गया तथा कई स्कूल और कालेज बंद करने पड़े जबकि 50 प्रतिशत सरकारी कर्मचारी ऑनलाइन काम कर रहे हैं। पाकिस्तान में पेट्रोलियम उत्पादों  की कीमतों में  भारी वृद्धि की गई है। नई दरों के अनुसर  डीजल की कीमत 54.9 प्रतिशत बढ़कर 520.35 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत 42.7प्रतिशत 458.40 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर हो गई है। गैस का सिलेंडर 5000 रुपए में मिल रहा है। दैनिक उपभोग की चीजों के दाम भी काफी बढ़ गए हैं जिस कारण पाकिस्तानी जनता में अपनी सत्ता के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। 

मध्यस्थता का सपना देख रहा पाकिस्तान

अपनी परेशान हो रही जनता के लिए तो पाकिस्तान की सरकार कुछ कर नहीं पा रही है किंतु अमेरिका और ईरान के साथ मध्यस्थता का सपना देख रही है। मध्यस्थता के इस दिवा स्वप्न ने पाकिस्तान की मुसीबतें  बढ़ानी शुरू कर दी हैं। ईरान के साथ पाकिस्तान की निकटता से संयुक्त अरब अमीरात नाखुश हो गया है और उसने पाकिस्तान से अपना 3.5 अरब डालर का कर्ज वापस मांग लिया है। पाकिस्तान ने महीने के अंत से पहले कर्ज लौटाने का फैसला लिया है जिससे उसकी बची- खुची अर्थव्यव्यवस्था  भी डांवाडोल हो जाएगी । संयुक्त अरब अमीरात के फैसले से पाकिस्तान की जनता अपने देश  की विदेश नीति की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठा रही है।

पाकिस्तान आतंकवाद सूचकांक में बना नंबर वन

पाकिस्तान अपनी विकास की गति को भले ही तीव्र न कर पाया हो किंतु आतंकवाद सूचकांक में नम्बर वन हो गया है। अमेरिकी संसद कांग्रेस शोध संस्थान (सीआरएस) की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान लगातार भारत में जम्मू कश्मीर समेत कई हिस्सों में आतंकवादी वारदातों की साजिश रचने वाले संगठनों को शह दे रहा है। भारत के वर्षों के सैन्य अभियानों और नीतिगत उपायों के बावजूद लश्कर- ए -तैयबा व जैश-ए- मोहम्मद जैसे आतंकी समूह पाकिस्तान की धरती पर फल फूल रहे हैं। पाकिस्तान में  कुछ आतंकी संगठन 1980 के दशक से अस्तित्व में है। लश्कर -ए - तैयबा को 2001 में विदेशी आतंकवादी संगठन बताकर प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसके सरगना हाफिज सईद ने प्रतिबंधों  से बचने के लिए समूह का नाम बदलकर  जमात - उद- दवा कर दिया। रिपोर्ट में पाकिस्तान के 15 आतंकी समूहों की सूची दी गई है इनमें  से 12 को अमेरिकी कानून के तहत विदेशी आतंकी संगठन (एफटीओ) घोषित किया गया है। 

आतंरिक परेशानियों में उलझ रहा पाक

पाकिस्तान ईरान युद्ध की आड़ में भारत को धमकी दे रहा है।अभी अमेरिका की मंत्री तुलसी गाबार्ड  ने अमेरिकी सीनेट में भी बताया था कि पाकिस्तान अमेरिकी सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बनकर उभर रहा है। पाकिस्तान  एक ऐसी मिसाइल बना रहा है जिससे उसकी मारक क्षमता वाशिंगटन तक हो सकती है। उसके बाद पाकिस्तान से बयान आया कि अगर अमेरिका ने पाकिस्तान पर हमला बोला तो वह भारत पर बिना कुछ सोचे समझे हमला कर देगा। 

आतंरिक परेशानियों से घिरा और कर्ज में डूबा  पाकिस्तान भारत से भिड़ने के नये रास्ते खोज रहा है क्योंकि अपने देश के आतंरिक गुस्से को काबू करने का उसके पास यही तरीका है। पाकिस्तान को याद रखना चाहिए   कि ये नया भारत है और अगर पाकिस्तान कोई गलती करता है तो उसे न केवल  पाषाण युग में जाना पड़ सकता है या हो सकता है कि उसका अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। 

अन्य प्रमुख खबरें