भारत और न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता
Mritunjay Dixit
रूस यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण दुनिया भर में मची उथल -पुथल से अनेक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत अपने लिए नये माध्यम और साथियों की खोज कर रहा है। इसी क्रम में भारत और न्यूजीलैंड के मध्य एक अहम द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता संपन्न हुआ है। माना जा रहा है कि भविष्य में यह समझौता विकसित भारत के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा। नौ महीने के अंदर दोनो देशों के मध्य हुए समझौतों का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दो गुणा करके पांच अरब डालर तक पहुंचाना है। यह समझौता भारत के विकसित देशों के साथ प्रगाढ़ होते संबंधों का प्रमाण है।
भारत व न्यूजीलैंड दोनों को लाभ
इस समझौते के परिणामस्वरूप न्यूजीलैंड के बाजार में भारत की अधिकतर वस्तुएं शून्य शुल्क पर जाएंगी। इससे न्यूजीलैंड में कपड़ा, चमड़े का सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स , केमिकल्स, इंजीनियरिंग सामान जैसे कई उत्पादों क निर्यात बढ़ेगा। इस समझौते से भारत व न्यूजीलैंड दोनों को ही लाभ होगा। अब भारत के सभी उत्पादों तथा श्रम प्रधान क्षेत्र जैसे कपड़ा, प्लास्टिक, चमड़ा व इंजीनिंयरिंग सामान पर न्यूजीलैंड में शुल्क नहीं लगेगा। वहां औसत आयात शुल्क मात्र 2.3 प्रतिशत है। न्यूजीलैंड भारत में 15 वर्षों में 20 अरब डालर का निवेश करेगा। यह निवेश, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, सेवा, नवाचार और रोजगार सृजन करने वाले क्षेत्रों में आएगा। भारत के लिए आईटी, आईटी आधारित सेवाएं ,पेशेवर सेवाएं, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, पर्यटन और अन्य व्यावसायिक सहित कई उच्च मूल्य सेवा क्षेत्रों में अवसर खुलेंगे। कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए हर वर्ष 5000 अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा मिल सकेगा। इसके अंतर्गत अधिकतम तीन वर्ष तक न्यूजीलैंड में रहने की अनुमति मिल सकेगी। भारत से शराब एवं स्पिरिट का शुल्क मुक्त निर्यात हो सकेगा।
एफटीए लागू होने के पहले दिन से ही न्यूजीलैंड के 54.11 प्रतिशत निर्यात पर भारत में शुल्क नहीं लगेगा। इनमें भेड़ का मांस, ऊन, कोयला तथा वन एवं लकड़ी उत्पाद शामिल हैं। सेब, कीवी, मुनक्का, शहद ओैर एल्ब्यूमिन जैसे कृषि उत्पादों पर शुल्क में रियायत कोटा एवं न्यूनतम आयात मूल्य के साथ मिलेगी। समुद्री उत्पादों पर शुल्क सात वर्ष में समाप्त होगा। लोहा, इस्पात और स्क्रैप एल्युमिनियम की कई वस्तुओं पर शुल्क 10 वर्षो में या उससे भी कम समय में समाप्त किया जायेगा।
पेशेवर लोगों को समझौते से होगा खास लाभ
अभी भारत का न्यूजीलैंड के साथ व्यापार 2.4 अरब डॉलर का है जो 2030 तक 5 अरब डॉलर तक हो जाएगा। सीधे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि अब 70 भारतीय उत्पाद शुरुआत में ही बिना शुल्क न्यूजीलैंड जा सकेंगे। एफटीए के बाद भारत 8,284 उत्पादों का शुल्क मुक्त निर्यात कर सकेगा। वहीं न्यूजीलैंड के 100 सेक्टरों में भारत के युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
दोनों देशों का मानना है कि यह कई पीढ़ियों मे होने वाला समझौता है तथा वैश्विक अनिश्चितता के बीच द्विपक्षीय व्यापार के सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद तरीके से चलने का भरोसा देता है। यह समझौता भारत और न्यूजीलैंड के दृष्टिकोण से अहम है। यह दोनों देशों को जोड़ने वाले गहरे भरोसे, साझा मूल्यों और महत्वाकांक्षा को दिखाता है। एफटीए के बाद न्यूजीलैंड हर वर्ष योग व संगीत से जुड़े एक हजार भारतीय युवाओं को वीजा देगा । न्यूजीलैंड पढ़ने जाने वाले छात्र वहां काम भी कर सकेंगे। आईटी, स्वस्थ्य, शिक्षा, निर्माण पर्यटन से जुड़े पेशेवर लोगों को इसका लाभ मिलेगा। यही नहीं न्यूजीलैंड में जो तीन लाख भारतीय रहते हैं उनके साथ संवाद व समन्वय स्थापित होगा और भविष्य में दोनों देशों के मध्य मित्रता और गहरी होगी।
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