राष्ट्रवादियों व स्वतंत्रता आंदोलन को “एक नई क्षितिज” देनेवालोंकी भूमि,क्रांतिकारी आदर्शवादियों के लिए “ उर्वरा भूमि”का मंचप्रदान करने वालेबंगाल(अब पश्चिम बंगाल), जो स्वतंत्रता के पश्चात मार्क्सवादियों के हाथों में “सत्ता का होना “(राज्य, राज्य यांत्रिकी का विरोध एवं गोरिल्ला युद्ध शैली को बढ़ावा देना) लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में 2011 में बंगाल की जनता की पसंद ममता बनर्जी केकड़ेमुकाबला के पश्चात वामपंथी एवं वामपंथी विचारधारा का बुरी तरहपराजय हुआ था । यह इस तथ्य का संकेत था कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को “ विकास ,विश्वास ,भय मुक्त शासन एवं अपराध मुक्त नागरिक समाज” देंगी ,लेकिन तृणमूल कांग्रेस के भ्रष्टाचार एवं स्थानीय स्तर के कार्यकर्ताओं का राज्य के नागरिकों पर दबाव एवं गुंडागर्दी का व्यवहार लोकतंत्र को अराजकता की ओरउन्मूख करता रहा हैं ।ममता दीदी “पारदर्शी शासन एवंभयमुक्त प्रशासन “के बजाय स्थानीय अराजकतावादी कार्यकर्ताओं का प्रबल समर्थक एवंअव्यवस्था को बढ़ावा देने वाली नौकरशाही की समर्थक हो चुकी थीं। पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिदृश्य में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी ) “चुनावी जीत “ से बहुत दूर थी।
स्वतंत्रता के पश्चात लोकतांत्रिक इतिहास में “ ऐतिहासिक मतदान “ लगभग 93% मतदान “सत्ता परिवर्तन का चुनावी संकेत है।” लोकतंत्र में परंपरागत मतदाता, बहते हुए मतदाता एवं बदलते हुए मतदाता होते हैं। चुनावी विमर्श में परंपरागत मतदाता “व्यक्तित्व” (परंपरागत एवं करिश्माई व्यक्तित्व) से आकर्षित होते हैं, लेकिन बहते हुए मतदाता एवं बदलते हुए मतदाता “परिस्थितियों ,नीतियों एवं कार्यक्रमों” के आधार पर बदलते रहते हैं।
हिंसा विहीन मतदान का आशय है कि “मतदाता अपने मन: मस्तिष्क में प्रत्याशी को मतदान के लिए चयनित करता है।” स्वतंत्रता के पश्चात एवंगणतांत्रिक व्यवस्था स्थापित होने के पश्चात यह पहला लोकतांत्रिक चुनाव है, जिसमें “न्यूनतम हिंसा” हुई है एवं विशेष गहन पुनरीक्षण( SIR) की लंबी प्रक्रिया के पश्चात “ भारी उत्साह” का परिदृश्य था। 2021 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के पास ‘जमीनी /धरातलीय कार्यकर्ता’ का अभाव था, जिसको केंद्रीय संगठन एवं प्रदेश संगठन ने “समन्वय, पुरस्कार एवं पकड़” के द्वारा पश्चिम बंगाल में मजबूत संगठन की नींव को तैयार किया है। राजनीतिक बदलाव की जमीन वर्ष 2021 के विधानसभा में ही बीजेपी तैयार कर दीथीं। इसने अपने संघर्ष ,सतत् प्रयासएवं लोकलगाव से 77 सीटेंप्राप्त कर “मुख्य विपक्षी दल” की स्थिति प्राप्त कर ली थी।
चुनाव के लिए “विकास एवं सुशासन प्रासंगिक संप्रत्यय है।” विकास से जनता आकर्षित होती है एवं सुशासन से शासकीय संरचना के प्रति विश्वास बहाली होती है। पश्चिम बंगाल चुनाव में नेतृत्व की अनिश्चितता बड़ा सवाल रहा है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने नेतृत्व के प्रति विश्वास से बंगाली अवाम को संतुष्ट कर दिया था। तृणमूल कांग्रेस कासांगठनिक ढांचा “लुंज पुंज “हो गई है, जबकि भारतीय जनता पार्टी का सांगठनिक ढांचा अनुशासित ,केंद्रीय स्तर ,प्रांत स्तर एवं स्थानीय स्तर पर “समन्वय ,मजबूत रणनीति एवं सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन” की ओर अग्रसर रहा है।
मतदाता सूचियां के गहन पुनरीक्षण( SIR) कीअद्यतन भूमिका भी “प्रचंड जीत” में एक महत्वपूर्ण कारक है । भाजपा ने विधानसभा, 2021 में “किए गए गलतियों एवं लापरवाहियों “ से सबक लेते हुए “सकारात्मक अभियान “ पर ध्यान केंद्रित किया जिसका चुनावी संग्राम में सहयोग मिला है । अपनी चुनावी रणनीतियां एवं व्यापकसांगठनिकअनुभव को क्रियान्वित कर “जमीनी धरातल” पर फायदे मिले हैं। वर्तमान में नितिन नवीन जी जैसा युवा अध्यक्ष का युवाओं पर ऊर्जावान प्रभाव पड़ा है ,जिससे मतदाता अन्य राज्यों एवं विदेशों से मतदान के लिए प्रेरित हुए हैं।
हिंदुत्व, संस्कृति एवं धार्मिक पहचान के प्रति हिंदुओं के एक व्यापक “बौद्धिक पुनर्जागरण” ने एक ‘स्थाई मतदाता आधार बैंक’ का निर्माण किया है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का शासन कुशासन का पर्याय बन गया था एवं मुस्लिम तुष्टिकरण का प्रयोगशाला हो चुका था । तीन बार के सत्ता में रहने के बावजूद शासक - शासित के ‘मनोमालिन एवं सत्ता विरोधी जनमत ‘ के कारण ममता बनर्जी को“हार का सामना” करना पड़ा है । स्थानीय कार्यकर्ताओं के बर्बरतापूर्वक व्यवहार एवं अमानवीय वसूली से जनता त्रस्त होचुकी थीं । ममता बनर्जी के प्रति घोर असंतोष था। पश्चिम बंगाल में ‘भ्रष्टाचार’ के मामले मुख्य मुद्दे बने हुए हैं । सरकारी ठेके एवं सरकारी नियुक्तियों में भ्रष्टाचार सार्वजनिक हुए हैं। राज्य सरकार में 20000 करोड रुपए से अधिक की धोखाधड़ी हुई हैं । वर्ष2025 के सर्वेक्षण के अनुसार ,लगभग 58 प्रतिशत निवासियों को स्थानीय प्रशासन में रिश्वत देनी पड़ी थी।”
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुद्दा राज्य में लगातार चर्चा में है। विशेष गहन पुनरीक्षण के कारण लगभग 91 लाख मतदाताओं का नाम कटा है। यह संख्या मृत, स्थानांतरित, गैर - हाजिर, डुप्लीकेट,2002 की मतदाता सूची में दर्जन किए गए मतदाता एवं जिनके नाम दर्ज करने में “तार्किकविसंगतियां“ थी, वे सभी शामिल हैं ।पश्चिम बंगाल में राज्य विधानसभा में 112 ऐसीसीटें हैं ,जहां पर 25000 याउससे ज्यादा “नेट दिलीशन्स “ हुई है । “नेट डीलिशन “ में उन सभी मतदाताओं को शामिल किया गया है ,जिनके नाम “सूची” से हटाए गए हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण से हटे मतदाता अवैध मतदाता है। राजनीतिकविश्लेषकोंका कहना है कि अन्य राज्यों में प्रवासी मजदूर के रूप में काम करने वाले मतदाता बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल लौट आए थे। इन मतदाताओं के “बड़े भाग”ने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ मतदान किए थे। पश्चिम बंगाल में “रोजगार की समस्या” एवं तृणमूल कांग्रेस के “स्थानीय स्तर के कार्यकर्ताओंकी मनमानी” के कारण सत्ता विरोधी लहर थी।
सामयिक परिप्रेक्ष्यमें ममता बनर्जी की सरकार “महिला सुरक्षा” पर असहाय एवं नाकाम रही है। 2 साल पहले “RG कर आंदोलन” 2026 के चुनाव को प्रभावित किया है। भ्रष्टाचार, कुप्रशासन ,रोजमर्रा की जिंदगी मेंकथित तौर परकट मनी के आरोप, सिंडिकेट संस्कृति काबढ़ना , तृणमूल कांग्रेस के 15 साल शासन में “प्रशासनिक विफलताओं के आरोप “ 2026 के चुनाव में “हिंदू वोटो का ध्रुवीकरण अधिक देखा गया है।”मतदान शुरू होते ही चुनाव आयोग द्वारा 2 लाख 40 हजारसे ज्यादा केंद्रीय सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई, जो “ अभूतपूर्व” माना जा रहा है । इतनेबड़े सुरक्षा इंतजाम से चुनाव “काफी शांतिपूर्ण रहा और मतदाता बिना डर और दबाव के मतदान कर सके।”
डॉ.बालमुकुंद पाण्डेय
राष्ट्रीय संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना समिति झंडेवालान, नई दिल्ली ।
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