HSBC Report Budget 2026: केंद्र सरकार के बजट 2026-27 को लेकर अहम संकेत सामने आए हैं। वैश्विक वित्तीय संस्था एचएसबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, आगामी बजट में सरकार का मुख्य फोकस सुधारों को आगे बढ़ाने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने पर रहेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में यह बजट पेश करेंगी। माना जा रहा है कि यह बजट मध्यम अवधि की आर्थिक स्थिरता और दीर्घकालिक विकास को संतुलित करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।
एचएसबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार हाल के महीनों में शुरू किए गए आर्थिक सुधारों को बजट 2026 में भी जारी रखेगी। इनमें उदारीकरण, विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन और सरकारी योजनाओं के युक्तिकरण जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आर्थिक विकास की गति बनी रहे, साथ ही खर्च और राजस्व के बीच संतुलन भी कायम रहे।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि सरकार वित्त वर्ष 2026 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल कर लेगी। कर दरों में कटौती के कारण राजस्व में आई कमी की भरपाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से मिलने वाले मजबूत लाभांश से की जा सकती है। इसके अलावा, चालू व्यय में आंशिक कटौती भी घाटा नियंत्रण में मददगार होगी।
एचएसबीसी का मानना है कि योजनाओं में संभावित कटौती और खर्च के युक्तिकरण से सरकार को वित्त वर्ष 2027 में राजकोषीय घाटा घटाकर GDP के 4.2 प्रतिशत तक लाने में सहायता मिलेगी। यह संकेत देता है कि सरकार मध्यम अवधि में राजकोषीय समेकन के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में शुद्ध उधारी 11.5 लाख करोड़ रुपये पर स्थिर रह सकती है। हालांकि, उच्च मोचन देनदारियों के कारण सकल उधारी बढ़कर लगभग 16 लाख करोड़ रुपये हो सकती है। बावजूद इसके, यह वृद्धि नाममात्र GDP वृद्धि से कम रहने की उम्मीद है, जिससे उधारी का दबाव नियंत्रित रहेगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकारों के सार्वजनिक ऋण अनुपात में आने वाले वर्षों में वृद्धि देखने को मिल सकती है, क्योंकि उनके पास केंद्र जैसी सख्त राजकोषीय समेकन नीति नहीं है। हालांकि, सकारात्मक पहलू यह है कि राज्यों को शामिल करने के बाद भी कुल सकल बाजार उधारी नाममात्र GDP वृद्धि से कम रह सकती है।
एचएसबीसी को उम्मीद है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर उदारीकरण अभियान को आगे बढ़ाएंगी। लघु और मध्यम फर्मों के लिए विनिर्माण प्रोत्साहन, राज्यों को पूंजीगत ऋण देने के लिए पूंजीगत व्यय का विविधीकरण और सब्सिडी व केंद्र प्रायोजित योजनाओं का युक्तिकरण बजट के प्रमुख बिंदु हो सकते हैं।
अन्य प्रमुख खबरें
Sukhoi Fighter Jet Crash: असम में सुखोई-30 MKI फाइटर जेट क्रैश, दोनों पायलटों की मौत
Chardham Yatra 2026: बदरी-केदार में विशेष पूजा होगी महंगी? BKTC जल्द ला सकता है नया रेट चार्ट
भारत-नेपाल सीमा पूरी तरह सील, आवाजाही पर रोक, बाजारों पर बुरा असर
‘फांसी घर’ विवादः स्पष्टीकरण देंगे अरविंद केजरीवाल, समिति के सामने रखी ये मांग
Israel-Iran War: दुबई से भारत पहुंची एयर इंडिया की पहली फ्लाइट, उड़ानें फिर से बहाल
ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या पर सरकार की चुप्पी कायरता या कूटनीति? सोनिया का सरकार पर हमला
Israel Iran War: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बीच भारत भी हुआ एक्टिव, PM मोदी ने नेतन्याहू से की बात
Israel-Iran War: इंडिगो, एयर इंडिया सहित कई एयरलाइनों ने रद्द की फ्लाइट्स, जारी की ये गाइडलाइन
रानी लक्ष्मीबाई कृषि विवि दीक्षांत समारोह: युवाओं से देश के लिए बड़ा लक्ष्य तय करने का आह्वान