नई दिल्ली। राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप से 11 बच्चों की मौतों के बाद मचे हड़कंप पर अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर दिया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अब तक की जांच में किसी भी सिरप में जानलेवा रसायन डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) या एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) की मौजूदगी नहीं पाई गई है। हालांकि, विस्तृत जांच अभी की जा रही है। बीते दिनों मध्य प्रदेश और राजस्थान से सामने आया था कि कफ सिरप के सेवन के बाद 11 बच्चों की मौत हो गई। इससे देशभर में चिंता और दहशत फैल गई और सिरप की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे। बच्चों की मौतों के कारण को जानने के लिए केंद्रीय टीमों को मौके पर भेजा गया, जिसमें राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, CDSCO, और राज्य एजेंसियों के विशेषज्ञ शामिल थे।
एनआईवी, पुणे में की गई जांच में एक बच्चे में लेप्टोस्पायरोसिस की पुष्टि हुई है, जो कि दूषित पानी से फैलने वाला संक्रमण है। फिलहाल, मच्छर, पानी और श्वसन संक्रमण से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
DGHS (स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय) ने सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी करते हुए 5 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप देने में विशेष सावधानी बरतने को कहा है। एडवाइजरी में खासतौर पर यह हिदायत दी गई है-
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राजस्थान में संदिग्ध सिरप में प्रोपाइलीन ग्लाइकोल की भी मौजूदगी नहीं पाई गई। साथ ही बताया गया कि यह डेक्सट्रोमेथॉर्फन आधारित सिरप है, जो बच्चों के लिए आमतौर पर अनुशंसित नहीं है।
कफ सिरप को शुरुआती जांच में दोषमुक्त करार दिए जाने के बाद अब सबसे बड़ा और चुभता सवाल यही है, यदि सिरप जिम्मेदार नहीं था, तो फिर मासूमों की जान कैसे गई? अभी तक किसी अधिकारी या विशेषज्ञ के पास इसका ठोस जवाब नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बस यही कहा जा रहा है कि जांच अभी चल रही है।
इस बीच, जिन परिवारों ने अपने जिगर के टुकड़े खो दिए, उनके लिए हर पल भारी है। सवाल यह भी उठता है कि क्या यह दुखद घटनाएं यहीं रुक जाएंगी या फिर कोई और मां अपने बच्चे को खोने के लिए मजबूर होगी? फिलहाल, पूरे देश की निगाहें इस जांच के नतीजों पर टिकी हैं।
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