नववर्ष 2026 की आस्था: महाकाल से रामलला तक, मंदिरों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

खबर सार :-
नववर्ष 2026 की शुरुआत देशभर में आध्यात्मिक उल्लास और गहरी आस्था के साथ हुई। महाकाल, रामलला, काशी विश्वनाथ, जगन्नाथ, हरमंदिर साहिब और बांके बिहारी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति में आस्था आज भी जीवन का केंद्र है और नए साल की पहली किरण भक्तिभाव से रोशन हुई।

नववर्ष 2026 की आस्था: महाकाल से रामलला तक, मंदिरों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
खबर विस्तार : -

New Year 2026 Astha ka sailab: नए साल 2026 की शुरुआत देशभर में भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुई। साल के पहले ही दिन प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिली। उज्जैन के महाकाल मंदिर में बाबा महाकाल का अद्भुत राजा स्वरूप शृंगार हुआ तो अयोध्या के राम मंदिर, वाराणसी के काशी विश्वनाथ, पुरी के जगन्नाथ मंदिर, अमृतसर के हरमंदिर साहिब और मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में भी भक्तों का तांता लगा रहा। घना कोहरा, कड़ाके की ठंड और लंबी कतारें भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकीं।

महाकाल के दरबार में नववर्ष का भव्य आगाज़

नववर्ष 2026 के पहले दिन उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में अलसुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कोहरे से ढकी सड़कों पर श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े होकर बाबा महाकाल के दर्शन की प्रतीक्षा करते नजर आए। मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।

राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल

पंचामृत पूजन के बाद बाबा महाकाल का विशेष राजा स्वरूप शृंगार किया गया। जल, दूध, दही, घी और फलों से स्नान कराने के बाद बाबा के मस्तक पर चांद, सूरज और त्रिशूल अंकित किए गए। गुरुवार को हुए इस दुर्लभ शृंगार में चांद और सूरज का एक साथ दर्शन भक्तों के लिए विशेष आकर्षण रहा। मंदिर समिति के अनुसार, नववर्ष के अवसर पर रात 11 बजे तक कपाट खुले रहेंगे ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर सकें।

देश ही नहीं विदेश से भी बाबा के दरबार पहुंचे भक्त

महाकाल मंदिर के पुजारी ने बताया कि बाबा महाकाल के प्रति भक्तों की आस्था अटूट है। उनके लिए बीता वर्ष भी बाबा का था और आने वाला समय भी बाबा को समर्पित है। यही कारण है कि देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु नए साल पर बाबा के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे हैं।

काशी विश्वनाथ में मंगला आरती और गंगा आरती

वाराणसी में नववर्ष के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष मंगला आरती का आयोजन हुआ। बाबा विश्वनाथ का दूध, दही और घी से अभिषेक कर रुद्राक्ष और फूलों से शृंगार किया गया। अस्सी घाट पर गंगा आरती के साथ नए साल का स्वागत किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर प्रशासन ने बताया कि नववर्ष के मौके पर मंदिर देर रात तक खुला रहेगा।

अयोध्या में रामलला के दर्शन को उमड़ी लाखों की भीड़

नए साल के पहले दिन अयोध्या के राम मंदिर में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। रामलला के दर्शन और आशीर्वाद के साथ साल की शुरुआत करने के लिए लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के दूसरे वर्ष के अवसर पर भक्तों का उत्साह और अधिक नजर आया। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे।

जगन्नाथ धाम में ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारे

पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में भी नववर्ष की पहली सुबह से भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। ब्रह्म मुहूर्त से ही दर्शन शुरू हो गए। घने कोहरे और ठंड के बावजूद श्रद्धालु महाप्रभु के दर्शन के लिए डटे रहे। मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया। श्री जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद पाधी ने बताया कि सभी अनुष्ठान तय कार्यक्रम के अनुसार सुचारू रूप से चल रहे हैं। पुलिस, जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन ने मिलकर दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा है। नववर्ष के अवसर पर विशेष अनुष्ठान और महाभोग की तैयारियां भी पूरी की गई हैं।

हरमंदिर साहिब में अरदास के साथ नए साल की शुरुआत

अमृतसर में घने कोहरे के बीच श्री हरमंदिर साहिब में संगत की भारी भीड़ उमड़ी। भारत ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु अरदास के लिए पहुंचे। गुरुद्वारे को पीली और सफेद झिलमिलाती लाइटों से सजाया गया। संगत ने माथा टेककर नए साल में सुख-शांति की कामना की।

बांके बिहारी मंदिर में भीड़, व्यवस्थाओं पर सवाल

मथुरा के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में भी नववर्ष पर भारी भीड़ देखने को मिली। संकरी गलियों में श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। धक्का-मुक्की की स्थिति को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया। कमिश्नर शैलेंद्र सिंह और डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने मंदिर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और भीड़ नियंत्रण के निर्देश दिए।

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