दिल्ली-टोक्यो उड़ानों पर डीजीसीए सख्त: सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर एयर इंडिया के पायलटों को कारण बताओ नोटिस

खबर सार :-
दिल्ली-टोक्यो उड़ानों से जुड़ा यह मामला भारतीय विमानन सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है। डीजीसीए का सख्त रुख यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भी सुरक्षा नियमों से कोई समझौता नहीं होगा। अब निगाहें इस बात पर हैं कि एयर इंडिया और संबंधित पायलट इस नोटिस पर क्या जवाब देते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

दिल्ली-टोक्यो उड़ानों पर डीजीसीए सख्त: सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर एयर इंडिया के पायलटों को कारण बताओ नोटिस
खबर विस्तार : -

DGCA Action: भारत के विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए एयर इंडिया के कॉकपिट क्रू के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। दिल्ली और टोक्यो के बीच संचालित होने वाली एयर इंडिया की कुछ उड़ानों में तकनीकी खामियों के बावजूद संचालन किए जाने के मामले में डीजीसीए ने संबंधित पायलटों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नियामक ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

दो सप्ताह में मांगा गया जवाब

डीजीसीए ने पायलटों को भेजे गए नोटिस में उनसे दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब देने को कहा है। नोटिस में यह भी संकेत दिया गया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो एयरक्राफ्ट नियमों और नागरिक विमानन आवश्यकताओं (सीएआर) के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब देश के विमानन क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर निगरानी और सख्त की जा रही है।

किन उड़ानों से जुड़ा है पूरा मामला

डीजीसीए के अनुसार, यह नोटिस दिल्ली से टोक्यो जाने वाली फ्लाइट एआई-357 और टोक्यो से दिल्ली लौटने वाली फ्लाइट एआई-358 के संचालन से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया कि इन उड़ानों में इस्तेमाल किए गए विमान के लिए लागू मिनिमम इक्विपमेंट लिस्ट (एमईएल) मानकों के अनुरूप नहीं थी। एमईएल वह अनिवार्य सूची होती है, जिसके तहत यह तय किया जाता है कि किसी तकनीकी कमी की स्थिति में विमान उड़ान के लिए सुरक्षित है या नहीं।

तकनीकी मानकों में गंभीर चूक

नियामक की जांच में यह बात सामने आई कि जरूरी तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई और इसके बावजूद उड़ानों का संचालन जारी रखा गया। डीजीसीए ने साफ किया है कि यह कोई एक बार की घटना नहीं है। इससे पहले भी एयर इंडिया की अन्य उड़ानों में इसी तरह की तकनीकी खामियां सामने आ चुकी हैं, लेकिन समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए।

पायलटों की जिम्मेदारी पर सवाल

नोटिस में पायलटों से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के बावजूद उन्होंने उड़ान संचालन का फैसला क्यों लिया। डीजीसीए का मानना है कि कॉकपिट क्रू की भूमिका यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सबसे अहम होती है और किसी भी स्तर पर की गई लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। फिलहाल, एयर इंडिया की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

बार-बार सामने आ रहीं तकनीकी खराबियां

डीजीसीए का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब एयर इंडिया के विमानों में बार-बार तकनीकी खराबियों की खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में दिल्ली से मुंबई जा रही एयर इंडिया की एक उड़ान में टेकऑफ के कुछ ही देर बाद इंजन में खराबी आ गई थी। यह बी777-300ईआर विमान एहतियातन दिल्ली वापस लौटा और सुरक्षित रूप से लैंडिंग कराई गई।

इंजन ऑयल प्रेशर की गंभीर घटना

डीजीसीए के मुताबिक, टेकऑफ के बाद जब फ्लैप बंद किए जा रहे थे, तभी पायलटों ने दाएं इंजन में ऑयल प्रेशर कम पाया। कुछ ही समय में इंजन का ऑयल प्रेशर पूरी तरह शून्य हो गया। तय सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत पायलटों ने उस इंजन को बंद किया और विमान को सुरक्षित रूप से दिल्ली में उतारा गया।

जांच और सुधार की प्रक्रिया जारी

नियामक ने बताया कि इस घटना की विस्तृत जांच की जा रही है और सुधारात्मक कदम उठाने की प्रक्रिया जारी है। मामले की जांच एयरलाइन की स्थायी जांच समिति द्वारा की जाएगी, जो डीजीसीए के डायरेक्टर एयर सेफ्टी (नॉर्थ रीजन) की निगरानी में काम करेगी।

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