गोरखपुरः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवर्धन पूजा के पावन पर्व पर बुधवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर में श्रद्धाभाव से गौ पूजन किया। इस मौके पर उन्होंने न सिर्फ प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं, बल्कि गोवंश संरक्षण व संवर्धन को लेकर चल रही राज्य सरकार की योजनाओं की प्रगति को भ सामने रखा
सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने आम लोगों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को समस्याएं और शिकायत दूर रकन के लिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके उपरांत मुख्यमंत्री गोवर्धन पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां पर उन्हांेने स्वयं गायों को गुड़ खिलाकर गौसेवा का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोवर्धन पूजा हमारी कृषि संस्कृति की गहराई से जुड़ी हुई परंपरा है और यह भारतीय जीवनशैली की आत्मा को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा, गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के कृषि आधारित समाज की चेतना है। गौ और गौवंश हमारे अन्नदाता किसान के लिए आस्था ही नहीं, आजीविका और पोषण का भी आधार हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से देशभर में गोवर्धन योजना के तहत गोबर से जैविक खाद और इथेनॉल उत्पादन के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जो पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास में सहायक हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार तीन प्रमुख योजनाओं के माध्यम से गौवंश संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। राज्य में करीब 16 लाख गौवंश ऐसे हैं जिन्हें सरकार प्रत्यक्ष रूप से अनुदान देती है।
1. गौ आश्रय स्थल योजना: जहां हर संरक्षित गौवंश के लिए 1500 प्रतिमाह दिए जाते हैं।
2. सहभागिता योजना: कोई भी किसान अगर गौसंवर्धन से जुड़ता है, तो उसे भी प्रति गौवंश 1500 प्रतिमाह मिलते हैं।
3. कुपोषण मुक्ति योजना: इसके तहत गरीब व कुपोषित परिवारों को एक दूधारू गाय और 1500 महीना सहायता दी जाती है, जिससे परिवार पोषण की दिशा में आगे बढ़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये योजनाएं केवल परंपरा के पालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यावहारिक और विकास की सोच को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि बड़ी संख्या में लोग इन योजनाओं से लाभान्वित हुए हैं और कुपोषण से सुपोषण की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पावन पर्व पर प्रदेशवासियों, विशेषकर किसानों और पशुपालकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में पशुधन की पूजा का संदेश सदा से रहा है। गोवर्धन पूजा उसी सनातन परंपरा की जीवंत मिसाल है।
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