India Semiconductor GCC hiring: भारत का सेमीकंडक्टर सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है और इसके साथ ही ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) में भर्तियों का ग्राफ भी लगातार ऊपर जा रहा है। गुरुवार को जारी करियरनेट की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2026 की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च के दौरान सेमीकंडक्टर जीसीसी में ओपन रोल्स की संख्या बढ़कर 3,549 तक पहुंच गई। यह संकेत है कि भारत अब केवल आईटी सर्विस हब नहीं बल्कि हाई-एंड चिप डिजाइन और इंजीनियरिंग टैलेंट का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 में सेमीकंडक्टर जीसीसी में कुल 2,426 ओपन रोल्स थे। फरवरी में यह संख्या बढ़कर 3,077 पहुंच गई, जबकि मार्च में इसमें और तेजी आई और कुल ओपन पद 3,549 दर्ज किए गए। लगातार तीन महीनों में हुई यह वृद्धि इस सेक्टर में बढ़ते निवेश और विस्तार योजनाओं की ओर इशारा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में चिप निर्माण और डिजाइन की बढ़ती जरूरतों के कारण भारत में कंपनियां अपने इंजीनियरिंग और रिसर्च ऑपरेशंस का विस्तार कर रही हैं। इसका सीधा लाभ भारतीय टेक प्रोफेशनल्स को मिल रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि छोटे पैमाने के जीसीसी कुल सेंटर्स का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं और फिलहाल भर्ती प्रक्रिया में सबसे आगे हैं। पहले जहां भर्ती का नेतृत्व मुख्य रूप से बड़े ग्लोबल सेंटर करते थे, वहीं अब छोटे और मध्यम स्तर के सेंटर भी तेजी से अपनी टीमें तैयार कर रहे हैं। करियरनेट के चीफ बिजनेस ऑफिसर नीलाभ शुक्ला के अनुसार, कंपनियां अब बाजार स्थिर होने का इंतजार नहीं कर रहीं बल्कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए पहले से टैलेंट हायरिंग कर रही हैं। इससे यह साफ है कि आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर सेक्टर में रोजगार की संभावनाएं और बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रणनीतिक फैसले अभी भी अमेरिका में लिए जाते हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन तेजी से एशिया-प्रशांत क्षेत्र यानी जेएपीएसी देशों और खासतौर पर भारत में शिफ्ट हो रहा है। इससे भारत की भूमिका केवल सपोर्ट सेंटर तक सीमित नहीं रह गई है। भारत में मौजूद इंजीनियरिंग टैलेंट, कम लागत और मजबूत टेक इकोसिस्टम की वजह से बहुराष्ट्रीय कंपनियां यहां अपने डिजाइन और डेवलपमेंट सेंटर स्थापित कर रही हैं। यही कारण है कि भारत का सेमीकंडक्टर जीसीसी नेटवर्क लगातार मजबूत हो रहा है।
रिपोर्ट में हैदराबाद और बेंगलुरु को सेमीकंडक्टर भर्ती का सबसे बड़ा केंद्र बताया गया है। बेंगलुरु लंबे समय से टेक्नोलॉजी राजधानी के रूप में जाना जाता है, लेकिन अब हैदराबाद भी तेजी से उभरता हुआ सेमीकंडक्टर हब बन रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी समर्थन और कुशल इंजीनियरिंग टैलेंट की उपलब्धता के कारण कंपनियां इन शहरों में तेजी से निवेश कर रही हैं। आने वाले समय में पुणे, चेन्नई और नोएडा जैसे शहर भी इस दौड़ में शामिल हो सकते हैं।
भर्ती के आंकड़ों के अनुसार, वीएलएसआई (वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेशन) से जुड़े पदों की मांग 37 से 45 प्रतिशत तक रही। वहीं सिस्टम और एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर से जुड़े रोल्स की मांग 39 से 46 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई। इसके अलावा बिजनेस ऑपरेशंस और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े पदों की मांग 10 से 18 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि कंपनियां केवल डिजाइन इंजीनियर ही नहीं बल्कि सपोर्ट और ऑपरेशनल टीमों का भी विस्तार कर रही हैं।
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