वैश्विक तनाव का असरः Sensex 1,800 अंक टूटा, बाजार में मची हलचल, निवेशक परेशान

खबर सार :-
शेयर बाजार में आई यह बड़ी गिरावट कई वैश्विक और घरेलू कारणों का परिणाम है। भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर बाजार को कमजोर किया है। फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि अनिश्चितता अभी बनी हुई है और बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

वैश्विक तनाव का असरः  Sensex 1,800 अंक टूटा, बाजार में मची हलचल, निवेशक परेशान
खबर विस्तार : -

Indian Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को जोरदार गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। दोपहर 12:37 बजे सेंसेक्स 1,772 अंक यानी 2.32% गिरकर 72,803 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 565 अंक यानी 2.44% टूटकर 22,549 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा और लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा दबाव

बाजार की कमजोरी का असर व्यापक रूप से देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 2,074 अंक यानी 3.78% गिरकर 52,789 पर आ गया। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 648.70 अंक यानी 4.12% गिरकर 15,070 पर पहुंच गया। इससे साफ है कि छोटे और मझोले शेयरों में निवेशकों ने ज्यादा तेजी से मुनाफावसूली की।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मेटल सेक्टर सबसे बड़े लूजर

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। इन सेक्टरों में बिकवाली का दबाव ज्यादा रहा, जिससे बाजार की कमजोरी और गहराती गई।

अंतरराष्ट्रीय तनाव बना सबसे बड़ा कारण

बाजार में गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया। साथ ही ऊर्जा ढांचे पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दी। इसके जवाब में तेहरान ने क्षेत्रीय संपत्तियों पर हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद करने की धमकी दी। यह संघर्ष अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिससे वैश्विक निवेशकों में डर और अनिश्चितता बढ़ गई है।

एशियाई बाजारों से भी मिले कमजोर संकेत

भारतीय बाजार पर एशियाई बाजारों की गिरावट का भी असर पड़ा। टोक्यो, सोल, हांगकांग, शंघाई और बैंकॉक के बाजारों में 2% से लेकर 6.5% तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और बिकवाली तेज हुई।

महंगा कच्चा तेल बना चिंता का कारण

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार गिरावट का अहम कारण बनी। ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। ऊंची तेल कीमतें भारत जैसे आयातक देश के लिए महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ाती हैं।

एफआईआई की बिकवाली से बढ़ा दबाव

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला। शुक्रवार को एफआईआई ने 5,518.39 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 5,706.23 करोड़ रुपये का निवेश किया। बावजूद इसके, बाजार में गिरावट को रोका नहीं जा सका।

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