US-Iran Conflict Impact: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ तौर पर देखने को मिला। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया, जिसका सीधा असर घरेलू सूचकांकों पर पड़ा।
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1,836.57 अंक यानी 2.46 प्रतिशत गिरकर 72,696.39 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी50 601.85 अंक यानी 2.60 प्रतिशत टूटकर 22,512.65 पर आ गया। यह गिरावट हाल के दिनों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है।
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबारी दिन के दौरान बाजार ने और भी बड़ी गिरावट देखी। सेंसेक्स 73,732 के स्तर पर खुलने के बाद 1,974 अंक तक टूट गया और 72,558 के निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 22,824 से गिरकर 22,471 के स्तर तक पहुंच गया। इससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया।

निफ्टी इंडिया वीआईएक्स में तेज उछाल दर्ज किया गया, जो 19 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 27.17 तक पहुंच गया। यह संकेत देता है कि बाजार में अनिश्चितता और डर तेजी से बढ़ रहा है।
बेंचमार्क सूचकांकों के मुकाबले व्यापक बाजार में ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 3.90 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 3.94 प्रतिशत गिर गया। इससे छोटे निवेशकों को अधिक नुकसान उठाना पड़ा।
सेक्टोरल आधार पर देखें तो कंस्ट्रक्शन, रियल्टी और मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। कंस्ट्रक्शन ड्यूरेबल में 5 प्रतिशत से अधिक गिरावट आई, जबकि रियल्टी 4.74 प्रतिशत और मेटल 4.97 प्रतिशत गिरा। इसके अलावा बैंकिंग, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर भी दबाव में रहे, जबकि आईटी सेक्टर में अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज की गई।

इस भारी गिरावट के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 428.76 लाख करोड़ रुपए से घटकर 415.11 लाख करोड़ रुपए रह गया। यानी एक ही दिन में निवेशकों की संपत्ति में करीब 13.65 लाख करोड़ रुपए की गिरावट दर्ज की गई।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका द्वारा ईरान को दी गई चेतावनी और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ता तनाव बाजार के लिए बड़ा खतरा बन गया है। ईरान की ओर से भी कड़े जवाब ने हालात और गंभीर कर दिए हैं।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ सकता है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आती है, तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
भारतीय बाजार वैश्विक रुझानों का अनुसरण करता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया भर के बाजारों में कमजोरी देखने को मिली, जिसका असर भारत पर भी पड़ा।
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