India US trade deal: रेसिप्रोकल टैरिफ में कटौती से मोबाइल से दाल तक होगी सत्ती, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर

खबर सार :-
भारत-अमेरिका ट्रेड डील न सिर्फ द्विपक्षीय व्यापार को नई दिशा दे सकती है, बल्कि आम उपभोक्ताओं की जेब को भी राहत पहुंचा सकती है। टेक्नोलॉजी, कृषि और निर्यात क्षेत्रों में कीमतों में संभावित गिरावट से आर्थिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं। हालांकि, डील की पूरी शर्तें सामने आने के बाद ही इसका वास्तविक असर साफ होगा।

India US trade deal: रेसिप्रोकल टैरिफ में कटौती से मोबाइल से दाल तक होगी सत्ती, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर
खबर विस्तार : -

India US trade deal: भारत और अमेरिका के बीच रेसिप्रोकल टैरिफ घटाने को लेकर हुए ताजा ट्रेड समझौते ने बाजार में हलचल तेज कर दी है। इस डील का सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इसके चलते कई आयातित और निर्यात आधारित उत्पादों की कीमतों में कमी आ सकती है। टेक्नोलॉजी से लेकर कृषि और औद्योगिक सामान तक, इस समझौते का असर व्यापक माना जा रहा है।

टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स हो सकते हैं सस्ते

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ट्रेड डील के बाद लैपटॉप, स्मार्टफोन, टैबलेट, स्मार्टवॉच और अन्य मोबाइल गैजेट्स की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और उनके पार्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी कम होने से कंपनियों की लागत घटेगी, जिसका फायदा ग्राहकों तक पहुंच सकता है। घरेलू उपकरण जैसे माइक्रोवेव, वॉशिंग मशीन और किचन अप्लायंसेज भी सस्ते हो सकते हैं।

कृषि उत्पादों पर महंगाई का दबाव कम

इस समझौते से कृषि क्षेत्र को भी राहत मिलने की संभावना है। दालें, डेयरी प्रोडक्ट्स और प्रोसेस्ड फूड आइटम्स पर लगने वाला आयात शुल्क घट सकता है। इससे खाद्य महंगाई पर कुछ हद तक लगाम लग सकती है। पैकेज्ड फूड और रेडी-टू-ईट प्रोडक्ट्स की कीमतें भी कम होने की उम्मीद है, जिससे शहरी और अर्ध-शहरी उपभोक्ताओं को फायदा मिल सकता है।

टेक्सटाइल और जेम्स-ज्वेलरी सेक्टर को बढ़ावा

भारत-अमेरिका ट्रेड डील से टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है। टैरिफ कटौती से भारतीय कपड़ा उत्पाद अमेरिकी बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इसी तरह, जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर, जो भारत का प्रमुख निर्यात क्षेत्र है, को भी नई संभावनाएं मिल सकती हैं।

औद्योगिक सामान और सीमित चुनौतियां

स्टील, केमिकल और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे औद्योगिक उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच आसान हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर जैसे कुछ उत्पादों पर अब भी करीब 50 प्रतिशत तक ड्यूटी बनी रह सकती है। वहीं, कुछ ऑटोमोबाइल पार्ट्स पर भी उच्च टैरिफ जारी रहने की आशंका जताई जा रही है।

रणनीतिक और ऊर्जा आयाम

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इस समझौते के तहत भारत रूस से तेल आयात कम कर अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से तेल खरीद बढ़ा सकता है। इससे ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक संतुलन पर भी असर पड़ सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत के बाद इस ट्रेड डील को अंतिम रूप दिया गया। इसके तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जबकि भारत ने भी अमेरिकी सामान पर व्यापारिक बाधाएं कम की हैं। 

टैरिफ घटने से 1.4 अरब भारतीयों को होगा लाभः पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ घटने से 1.4 अरब भारतीयों को फायदा होगा।

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