पश्चिम बंगाल में लागू होगी PM SHRI स्कूल योजना, विकसित होंगे माॅडल स्कूल, छात्रों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
खबर सार :-
तीन साल की देरी व विवाद के बाद अब पश्चिम बंगाल में ‘पीएमश्री माॅडल स्कूल’ योजना शुरू होने जा रही है। सरकार के इस फैसले से विद्यार्थियों को गुणवत्तापरक शिक्षा व आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
खबर विस्तार : -
कोलकाता: लंबे इंतजार के बाद केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी PM-SHRI स्कूल योजना आखिरकार पश्चिम बंगाल में लागू होने जा रही है। लगभग तीन साल की देरी और कई विवादों के बाद, अब राज्य में इस प्रोजेक्ट को शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।
15 मई को दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और राज्य के स्कूली शिक्षा विभाग के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप राज्य में इस योजना को लागू करने पर सहमति बनी। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट पर काम बहुत जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
हर ब्लॉक से चुने जाएंगे स्कूल
इस योजना के तहत, राज्य के हर ब्लॉक से कम से कम एक स्कूल को 'मॉडल स्कूल' के तौर पर विकसित करने के लिए चुना जाएगा। इन स्कूलों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने से लेकर पढ़ाने के तरीकों तक व्यापक बदलाव किए जाएंगे, ताकि वे आस-पास के स्कूलों के लिए एक मिसाल बन सकें और अपने छात्रों के सर्वांगीण विकास में योगदान दे सकें। केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 27 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट आवंटित किया है। इसकी फंडिंग की जिम्मेदारी केंद्र (60%) और राज्य सरकार (40%) के बीच बांटी गई है। इसका उद्देश्य 2027 तक समग्र शिक्षा अभियान के हिस्से के तौर पर देशभर के हजारों स्कूलों को इस योजना के दायरे में लाना है।
क्यों रुकी थी योजना
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने शुरू में इस योजना पर आपत्तियां उठाई थीं। उनका तर्क था कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) के अंतर्गत आती है; इसलिए, चूंकि इस क्षेत्र में राज्य भी एक भागीदार है, ऐसे में स्कूलों के नाम के आगे 'PM-SHRI' लगाना अनुचित माना गया। नतीजतन, राज्य में इस योजना का कार्यान्वयन रुका रहा। राज्य के राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव के बाद, इस योजना को लागू करने की प्रक्रिया ने गति पकड़ी और अब इसे जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
चरणबद्ध तरीके से होगा बदलाव
योजना के शुरुआती चरण में, हर जिले के हर ब्लॉक से स्कूलों का चयन किया जा रहा है, जिन्हें बाद में चरणबद्ध तरीके से मॉडल स्कूलों में बदला जाएगा। शिक्षा विभाग के अनुसार, कई केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय पहले ही इस मॉडल के तहत विकसित किए जा चुके हैं। अब, राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को भी इस योजना के दायरे में लाया जाएगा। शिक्षा क्षेत्र के अनेक विशेषज्ञों और संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है और यह उम्मीद जताई है कि इससे राज्य के विद्यार्थियों को बेहतर गुणवत्ता वाली शिक्षा तथा आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
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