West Bengal: ED दफ्तर पहुंचे पूर्व मंत्री रथिन घोष, नगरपालिका भर्ती घोटाले के मामले में पूछताछ जारी
खबर सार :-
नगरपालिका भर्ती घोटाले के मामले में रथिन घोष ईडी दफ्तर में हाजिर हुए। इससे पहले उन्हें 4 बार नोटिस दी गई थी, लेकिन उन्होंने नजरअंदाज किया। इस मामले में ईडी पूर्व मंत्री सुजीत बोस को गिरफ्तार कर चुकी है।
खबर विस्तार : -
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में करोड़ों के म्युनिसिपल भर्ती घोटाले के सिलसिले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन से बच रहे रथिन घोष आखिरकार शुक्रवार को कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित ED दफ्तर में पेश हुए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली राज्य सरकार में रथिन घोष खाद्य और आपूर्ति मंत्री थे।
हालांकि तृणमूल कांग्रेस को हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन घोष 2011 से लगातार चौथी बार अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र उत्तर 24 परगना जिले की मध्यमग्राम विधानसभा सीट से दोबारा चुनाव जीतने में सफल रहे। घोष सुबह करीब 11 बजे ED के सॉल्ट लेक दफ्तर पहुंचे। पूछताछ के लिए दफ्तर में प्रवेश करने से पहले उन्होंने वहां इंतजार कर रहे मीडियाकर्मियों से कहा कि उन्हें इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है कि केंद्रीय एजेंसी ने उन्हें किस विशिष्ट कारण से समन किया है।
4 बार नोटिस को किया नजरअंदाज
ED ने विधानसभा चुनावों से पहले, पिछले महीने घोष को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए थे। हालांकि, उन्होंने ED के ऐसे चार नोटिसों को नजरअंदाज कर दिया था, यह कहते हुए कि वे चुनाव संबंधी कार्यों में व्यस्त हैं। फिर भी, आखिरकार वे शुक्रवार सुबह केंद्रीय एजेंसी के दफ्तर में पेश हुए। बता दें कि इसी म्युनिसिपल भर्ती घोटाले के मामले में ईडी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में अग्निशमन सेवा मंत्री रहे सुजीत बोस को गिरफ्तार कर चुकी है।
CBI भी कर रही मामले की जांच
ED अधिकारियों को म्युनिसिपैलिटीज के भीतर करोड़ों के भर्ती घोटाले के बारे में पहली बार तब जानकारी मिली, जब वे पश्चिम बंगाल में 'नौकरियों के बदले नकद' (cash-for-jobs) घोटाले से जुड़े एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले के सिलसिले में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े एक रियल एस्टेट प्रमोटर अयान सिल के आवास पर छापेमारी और तलाशी अभियान चला रहे थे। इसके बाद, कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी नगर पालिकाओं से जुड़े भर्ती मामले में एक समानांतर जांच शुरू कर दी। जैसे-जैसे दोनों केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों ने अपनी जांच आगे बढ़ाई, कई राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम सामने आए, जिनमें राज्य के मंत्री और सत्ताधारी दल के नेता भी शामिल थे।
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