Shivpuri Narwar Fort: ऐतिहासिक किले से तोप चोरी मामले में बड़ा खुलासा, रात में ड्यूटी से नदारद थे गार्ड

खबर सार :-

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में ऐतिहासिक नरवर किले से तोप चोरी के मामले में पुलिस ने नया खुलासा किया है। गार्ड ने पूछताछ में अपनी लापरवाही मान ली है। गार्डों ने डकैती की मनगढ़ंत कहानी सुनाई थी। पुलिस को जांच में तोप को घसीटकर ले जाने के निशान मिले हैं।
Shivpuri Narwar Fort: ऐतिहासिक किले से तोप चोरी मामले में बड़ा खुलासा, रात में ड्यूटी से नदारद थे गार्ड

खबर विस्तार : -

शिवपुरी: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में ऐतिहासिक नरवर किले से 16वीं सदी की एक दुर्लभ तोप (जिसका वज़न लगभग 3,500 किलोग्राम है) की चोरी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।

राज्य पुरातत्व विभाग और पुलिस की एक संयुक्त जांच टीम को घटनास्थल पर अहम सबूत मिले हैं, जो एक संगठित अंतरराष्ट्रीय एंटीक (प्राचीन वस्तु) तस्करी गिरोह की मिलीभगत की ओर इशारा करते हैं। एक बड़ा खुलासा यह हुआ है कि घटना की रात किले की सुरक्षा में तैनात दो गार्ड अपनी ड्यूटी छोड़कर घर चले गए थे; इसके अलावा, हथियारबंद बदमाशों द्वारा डकैती की जो कहानी उन्होंने सुनाई थी, वह पूरी तरह से मनगढ़ंत निकली।

घटनास्थल पर मिले अहम सुराग

narvar kila

संयुक्त जांच टीम को किले के ऊबड़-खाबड़ पिछले रास्ते पर गद्दे, रजाइयां, लोहे के पाइप, तोप को घसीटकर ले जाने के निशान और गाड़ियों के टायरों के निशान मिले। ये सबूत साफ तौर पर बताते हैं कि इस अपराध को बहुत ही सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था। पुलिस अब घटनास्थल से मिले सभी भौतिक सबूतों का फोरेंसिक विश्लेषण कर रही है और चोरी में इस्तेमाल की गई गाड़ी की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

गार्ड ने सुनाई डकैती की झूठी कहानी

एक दिन पहले 17 जुलाई को सिक्योरिटी गार्ड बाल किशन ने बताया कि आधी रात के करीब, 25-30 लोग अचानक पिछले दरवाज़े से अंदर घुस आए। वे सभी हथियारबंद थे। हमारे पास बचाव के लिए सिर्फ़ एक लाठी थी—हमारे पास टॉर्च तक नहीं थी। उन्होंने हमें घेर लिया और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद बदमाश किले के खुले आंगन में गए, जहाँ सिंधिया काल की 14 तोपें रखी हुई थीं, और उनमें से एक तोप लेकर भाग गए। अगली सुबह पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई।

रात में दोनों सुरक्षाकर्मी थे नदारद

पुलिस के पूछताछ करने पर गार्ड ने अपना झूठ स्वीकार कर लिया। सुरक्षा गार्ड बालकिशन वाल्मीकि ने माना कि किले में रात बिताने की कोई व्यवस्था नहीं थी। टॉर्च या सुरक्षा के अन्य उपकरणों के अभाव में, वह रात बिताने के लिए घर चला गया था। वहीं, दूसरे गार्ड, शरणलाल जाटव ने भी माना कि घटना के समय वह ड्यूटी पर नहीं था। उसने यह भी कबूल किया कि हथियारबंद बदमाशों द्वारा डकैती की जो कहानी पुलिस को बताई गई थी, वह झूठी थी।

तोप चुराने की पिछली कोशिश

जांच में यह भी पता चला कि 4-5 जुलाई की रात को बदमाशों ने इसी तोप को उसके स्टैंड से गिरा दिया था, लेकिन बहुत ज्यादा वजन होने के कारण वे इसे ले जाने में नाकाम रहे थे। हालांकि सुरक्षा गार्डों ने इस घटना की सूचना नरवर पुलिस स्टेशन को दी थी, लेकिन मामले को उतनी गंभीरता से नहीं लिया गया जितनी जरूरत थी। इसके बाद, तस्कर 15-16 जुलाई की रात को पूरी तैयारी के साथ वापस आए; उन्होंने बेयरिंग लगी लोहे की ट्रॉली का इस्तेमाल करके तोप को लगभग 3,000 फीट नीचे उतारा, उसे एक गाड़ी पर लादा और फरार हो गए। 

छह गार्ड तैनात होने के बावजूद चोरी

नरवर किले की सुरक्षा के लिए कुल छह गार्ड तैनात हैं—चार दिन की ड्यूटी के लिए और दो रात की ड्यूटी के लिए। हालांकि, जिस रात घटना हुई, उस रात ड्यूटी पर तैनात दोनों गार्ड गायब थे, जिससे चोरों को बिना किसी रुकावट के कई घंटों तक चोरी की वारदात को अंजाम देने का मौका मिल गया।

पुरातत्व विभाग और पुलिस के बयान

राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने कहा कि ऐतिहासिक तोप की चोरी की पुष्टि करने वाले पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त जांच की जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जाएगी। वहीं, नरवर के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) विनय यादव ने बताया कि जांच में सुरक्षा गार्डों की भारी लापरवाही सामने आई है। अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और तलाश जारी है। घटनास्थल पर मिले सबूतों के आधार पर चोरी में शामिल वाहन और अपराधियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

किले में अब 13 ऐतिहासिक तोपें शेष

नरवर किले के खुले आंगन (ओपन कचहरी) में सिंधिया राजवंश के समय की 14 दुर्लभ ऐतिहासिक तोपें रखी हुई थीं। इस चोरी के बाद वहां अब केवल 13 तोपें बची हैं। चोरी हुई तोप की लंबाई लगभग 5 फीट 10 इंच और चौड़ाई 30 इंच बताई जा रही है। इसे पीतल, तांबा, कांस्य और अष्टधातु (आठ धातुओं का मिश्रण) जैसी मिश्रित धातुओं से बनाया गया था और इस पर फारसी और देवनागरी दोनों लिपियों में कुछ लिखा हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अवैध एंटीक बाजार में इस दुर्लभ तोप की कीमत 2 करोड़ से 5 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है।

 

ये भी पढ़ेंः-  यूपी पुलिस का महाअभियान: 'ऑपरेशन साय-वज्र' के तहत 773 साइबर ठग गिरफ्तार, 1150 करोड़ से ज्यादा के फर्जीवाड़े का खुलासा

अन्य प्रमुख खबरें