केन-बेतवा परियोजना को लेकर ग्रामीणों का चिता आंदोलन जारी, उमंग सिंघार ने लगाए अनियमितताओं के आरोप

खबर सार :-

मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन लगातार जारी है। महिलाएं 14 दिनों से प्रतीकात्मक रुप से चिता पर लेटकर धरना प्रदर्शन कर रही हैं। इस पर मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मौजूदा सरकार से जवाबदेही की मांग की है।
केन-बेतवा परियोजना को लेकर ग्रामीणों का चिता आंदोलन जारी, उमंग सिंघार ने लगाए अनियमितताओं के आरोप

खबर विस्तार : -

Ken Betwa Link Project: छतरपुर में केन बेतवा लिंक परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन लगातार जारी है। ग्रामीण पिछले कई दिनों से अनोखा चिता आंदोलन कर रहे हैं। यहां के आदिवासी और किसानों पिछले 14 दिनों से अपनी मांगों को लेकर प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटे हैं। इस दौरान एमपी में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बेतवा नदी जोड़ो परियोजना में बड़े स्तर पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मौजूदा सरकार से जवाबदेही की मांग की है। 

छतरपुर में 14 दिनों से चिताओं पर लेटे हैं ग्रामीण

मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों के आदिवासी और किसानों में केन बेतवा लिंक परियोजना के कारण अपने विस्थापन, अपर्याप्त मुआवजा और पुनर्वास में हो रही भारी देरी के विरोध में अनोखा प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए चिता आंदोलन और फांसी सत्याग्रह जैसे तरीकों से आंदोलन कर रहे हैं। विस्थापितों का आरोप है कि उन्हें घर तोड़ने के बाद मिलने वाली राशि बहुत कम है, जिससे एक नया घर बनवाना बहुत मुश्किल है। इसके साथ ही उनका कहना है कि जमीन के बदले जमीन और घर के बदले घर दिया जाए। कई मून निवासियों का दावा है कि उनके नाम आधिकारिक पुनर्वास सूची से बाहर कर दिया गया है। किसानों ने मुआवजा वितरण और सरकारी दावों में भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। इस आंदोलन में महिलाएं भी शामिल हैं।  

14 जुलाई को छतरपुर जिले के ग्राम कूपी का दौरा 

इस बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को बातचीत के दौरान आरोप लगाते हुए कहा कि 44 हजार करोड़ की केन-बेतवा लिंक परियोजना में पहले चरण से ही मुआवजा, भूमि अभिलेखन और पुनर्वास से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। सिंघार ने 14 जुलाई को छतरपुर जिले के ग्राम कूपी का दौरा किया और आंदोलन कर रहे लोगों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि प्रभावित ग्रामीणों के अनुसार पिछले चार सालों से कानूनी रुप से ग्राम सभा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने आगे कहा कि प्रभावित परिवारों को सामाजिक प्रभाव आकलन की जानकारी नहीं दी गई और उन्हें प्रक्रिया का हिस्सा भी नहीं बनाया गया। 

मुख्यमंत्री से आंदोलन स्थल पर कैबिनेट बैठक मांग 

सिंघार ने कहा कि रतिया, करी, खटवानी,  पालकोहा, नय्यापुर, खजुरी और सुकवाहा ग्राम पंचायतों के कार्यवाही रजिस्टरों में समान भाषा दर्ज मिली। उनका कहना है कि अधिकांश ग्राम सभाओं की बैठकें एक ही समय पर दर्ज की गई है, जिससे प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि आदिवासी ग्राम सभाओं को सिर्फ औपचारिकता बनाकर रखा गया और खरिहानी ग्राम पंचायत के रजिस्टर में ऐसे व्यक्ति के हस्ताक्षर दर्ज हैं, जो उस समय सरपंच नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा नहीं मिला, जबकि करोड़ों रुपये अपात्र लोगों को दिए गए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आंदोलन स्थल पर कैबिनेट बैठक करने की मांग भी की। 

अन्य प्रमुख खबरें