लखनऊ के संदीप सिंह हत्याकांड में बड़ी कामयाबी, एसटीएफ ने दबोचा ₹1 लाख का इनामी शूटर सचिन कुमार
खबर सार :-
लखनऊ के चर्चित प्रापर्टी डीलर संदीप सिंह हत्याकांड (Sandeep Singh Murder Case) में यूपी एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। ₹1 लाख के इनामी शूटर सचिन कुमार को बिना नंबर की बाइक और मर्डर वेपन के साथ अरेस्ट कर लिया गया है।
खबर विस्तार : -
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (UP STF) ने राजधानी लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र में हुए चर्चित प्रापर्टी डीलर संदीप सिंह हत्याकांड (Sandeep Singh Murder Case) में एक बड़ी सफलता हासिल की है। एसटीएफ की टीम ने मामले में लंबे समय से फरार चल रहे और एक लाख रुपये के इनामी बदमाश सचिन कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के पास से वारदात में इस्तेमाल की गई बिना नंबर की मोटरसाइकिल, अवैध हथियार और नकदी बरामद की है।

किसान पथ ओवरब्रिज के पास से हुई गिरफ्तारी
एसटीएफ से मिली जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई बुधवार (08 जुलाई, 2026) की रात करीब 11:15 बजे की गई। पुलिस टीम को मुखबिर से सटीक सूचना मिली थी कि संदीप सिंह हत्याकांड (Sandeep Singh Murder Case) का वांछित आरोपी सचिन कुमार किसी से मिलने के लिए पीजीआई थाना क्षेत्र के डलौना स्थित किसान पथ ओवरब्रिज के नीचे आने वाला है। एसटीएफ और स्थानीय पीजीआई थाने की संयुक्त टीम ने घेराबंदी करके आरोपी को मौके पर ही दबोच लिया। पुलिसी पूछताछ में आरोपी सचिन कुमार ने बताया कि वारदात के दिन वही सफेद रंग की अपाचे मोटरसाइकिल चला रहा था, जबकि उसका साथी संजय उर्फ संजीव पीछे बैठा था। संजय ने ही संदीप सिंह पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं।
आपसी रंजिश और ₹1 लाख की सुपारी
सचिन कुमार ने खुलासा किया कि इस पूरे हत्याकांड के पीछे दिनेश यादव नाम के व्यक्ति की संदीप सिंह के साथ चल रही पुरानी दुश्मनी थी। दिनेश यादव हर हाल में संदीप को रास्ते से हटाना चाहता था। दिनेश के ड्राइवर मुकरबीन ने इस काम के लिए अपने गांव के गंगा राम यादव से संपर्क किया, जिसके संबंध खान मुबारक गैंग के अपराधियों से थे। इसके बाद दिनेश यादव ने शूटर संजय और सचिन को काम पर रखा और संजय को 1 लाख रुपये एडवांस दिए। सचिन को इस काम के बदले 2 लाख रुपये मिलने वाले थे। आरोपियों ने रेकी करने के लिए लखनऊ के अमीनाबाद से बिना नंबर की एक सफेद अपाचे मोटरसाइकिल खरीदी थी, जिसका इस्तेमाल 27 मई 2026 को संदीप सिंह की हत्या में किया गया था।
दीनदयाल पार्क के पास घेरा, दफ्तर के बाहर मारी गोली
पूछताछ में सचिन ने बताया कि 27 मई को वे दीनदयाल पार्क के पास से संदीप की कार का पीछा कर रहे थे। जैसे ही संदीप सिंह अपने दफ्तर के बाहर गाड़ी से उतरे, संजय ने उनके सीने और सिर में तीन गोलियां दाग दीं। संदीप की मौके पर ही मौत हो गई। इस हाईप्रोफाइल मामले (Sandeep Singh Murder Case) के बाद एसटीएफ लगातार कार्रवाई कर रही थी। इससे पहले 15 जून को साजिशकर्ता गंगाराम यादव को पकड़ा गया था, जबकि मुख्य शूटर संजय उर्फ संजीव 27 जून को पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। संजय की मौत के बाद सचिन काफी डर गया था और आत्मसमर्पण करने के लिए वकील की तलाश में लखनऊ आया था, तभी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर देवी सिंह खेड़ा गांव के पास छिपाई गई .32 बोर की पिस्तौल और तीन जिंदा कारतूस भी बरामद कर लिए हैं।
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