रेलवे का नया फरमान: 31 जुलाई से शुरू हुई लगेज की ऑनलाइन बुकिंग और सफर के बदलते मायने

खबर सार :-

रेलवे ने 31 जुलाई से लगेज की ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था लागू कर दी है। अब तय सीमा से अधिक सामान ले जाना भारी जुर्माना ला सकता है। जानिए नए नियम।
रेलवे का नया फरमान: 31 जुलाई से शुरू हुई लगेज की ऑनलाइन बुकिंग और सफर के बदलते मायने

खबर विस्तार : -

Luggage Booking Rules : भारतीय रेल से सफर करने वाले मुसाफिरों के लिए अब डिब्बे में पैर रखने से पहले अपने थैलों और बोरियों का हिसाब लगाना अनिवार्य हो गया है। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगेज के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ट्रेन में चढ़ने से पहले ही यह तय हो जाएगा कि आपके साथ सफर में कितना वजन जा रहा है। स्टेशन पर लंबी कतारों में लगने और पार्सल बाबू के चक्कर काटने के दिन अब लदने लगे हैं क्योंकि आधुनिकता की इस दौड़ में रेलवे ने एक और कदम आगे बढ़ा दिया है।

घर बैठे तय करें सामान का वजन

अब तक का दस्तूर यह था कि यात्री टिकट कटाकर चुपचाप ट्रेन में चढ़ जाते थे और स्टेशन पर लगेज का झंझट आखिरी वक्त तक बना रहता था। कई बार तो बिना रसीद के भारी-भरकम संदूक डिब्बे में खींच लाए जाते थे जिससे दूसरे यात्रियों को भी दुश्वारी उठानी पड़ती थी। इस नई व्यवस्था के तहत अब टिकट बुक करते वक्त ही यात्री अपने लगेज की ऑनलाइन बुकिंग घर बैठे आसानी से कर सकते हैं। आईआरसीटीसी के पोर्टल पर यह सुविधा उपलब्ध करा दी गई है जिससे सफर से पहले ही पार्सल शुल्क का भुगतान ऑनलाइन हो जाता है। इससे स्टेशन की भागदौड़ और अंतिम समय की अफरा-तफरी से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा।

किस श्रेणी में कितना सामान ले जाने की है छूट

रेलवे ने हर श्रेणी के मुसाफिर के लिए मुफ्त सामान की सीमा और अतिरिक्त वजन के आंकड़े तय कर दिए हैं। यदि आप एसी फर्स्ट क्लास में सफर कर रहे हैं तो आपको बेहतर रियायत मिलती है, वहीं स्लीपर और जनरल श्रेणी के अपने अलग कायदे हैं।

  • एसी फर्स्ट: इस श्रेणी में तय सीमा के अलावा ऑनलाइन बुकिंग के जरिए अधिकतम डेढ़ सौ किलोग्राम तक सामान ले जाया जा सकता है।
  • एसी टू टियर: यहां मुफ्त कोटे के बाद अधिकतम सौ किलोग्राम तक का अतिरिक्त वजन ले जाने की अनुमति ऑनलाइन माध्यम से मिलती है।
  • स्लीपर क्लास: सामान्य और मध्यम वर्ग के पसंदीदा इस कोच में अस्सी किलोग्राम तक की अधिकतम सीमा तय की गई है।
  • सामान्य कोच: जनरल डिब्बों में सफर करने वाले मुसाफिर सत्तर किलोग्राम तक का अतिरिक्त भार नियमों के दायरे में ले जा सकते हैं।

इन तय आंकड़ों से ज्यादा बोझ लादकर चलने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। अगर किसी ने बिना पूर्व अनुमति या ऑनलाइन पर्ची के भारी सामान डिब्बे में ठूंस रखा है, तो पकड़े जाने पर उसे भारी पेनल्टी चुकानी होगी जो सामान्य शुल्क से कई गुना ज्यादा तक हो सकती है।

पारदर्शिता और यात्रियों की सहूलियत

इस पूरी कवायद के पीछे रेलवे का मुख्य उद्देश्य व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और स्टेशनों पर लगने वाली भीड़ को कम करना है। जानकारों का मानना है कि इस डिजिटल पहल से यात्रियों का सफर ज्यादा सुगम होगा। झांसी मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक नीरज भटनागर का भी यही कहना है कि इस नई प्रणाली से यात्रियों को पार्सल घरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और वे निश्चिंत होकर अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे। तकनीक के जरिए हर श्रेणी के हिसाब से शुल्क और वजन की पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से स्क्रीन पर आ जाती है जिससे किसी भी प्रकार के भ्रम या विवाद की गुंजाइश ही नहीं बचती।

सफर को सुगम बनाने की दिशा में एक कदम

बदलाव हमेशा एक नई शुरुआत लेकर आते हैं और शुरुआत में थोड़ी असुविधा लग सकती है, लेकिन लंबी अवधि में यह नियम यात्रियों के हित में ही साबित होंगे। जब हर यात्री अपने हिस्से का सामान तय सीमा में रखेगा, तो बोगियों में चलने-फिरने की जगह बचेगी और सफर का अनुभव सुखद बनेगा। अब जरूरत इस बात की है कि मुसाफिर यात्रा की योजना बनाते वक्त ही अपने सामान का सही आकलन कर लें और समय रहते लगेज की ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया को पूरा कर लें, ताकि रेलवे स्टेशन पहुंचते ही किसी अनचाहे जुर्माने या झिकझिक का सामना न करना पड़े।

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