केरल वक्फ बोर्ड का हुआ पुनर्गठन, IUML नेता एमसी मयिन हाजी बने नए चेयरपर्सन

खबर सार :-

केरल की UDF सरकार ने राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया। IUML नेता एमसी मयिन हाजी चेयरपर्सन बने। दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद होगी।
Kerala Waqf Board: बोर्ड का पुनर्गठन, एमसी मयिन हाजी बने चेयरपर्सन

खबर विस्तार : -

तिरुवनंतपुरम: केरल में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार ने केरल राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के वरिष्ठ नेता एमसी मयिन हाजी को बोर्ड का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही IUML विधायक कुरुक्कोली मोइदीन को भी बोर्ड में सदस्य बनाया गया है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पिछले वक्फ बोर्ड के सदस्यों की योग्यता को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट में लंबित है और नए कानूनी प्रावधानों के तहत बोर्ड की संरचना को लेकर भी प्रक्रिया जारी है।

नए बोर्ड में अलग-अलग वर्गों और समुदायों से जुड़े सदस्यों को शामिल किया गया है। हालांकि, बोर्ड में दो सदस्य पद अभी खाली हैं। नए कानून के प्रावधानों के तहत इन पदों पर दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति की जानी है, लेकिन यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश के बाद ही की जाएगी।

एमसी मयिन हाजी को मिली बोर्ड की कमान

केरल राज्य वक्फ बोर्ड के नए चेयरपर्सन एमसी मयिन हाजी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता हैं। उनके साथ IUML विधायक कुरुक्कोली मोइदीन को भी बोर्ड में जगह दी गई है। राज्य सरकार के इस फैसले से वक्फ बोर्ड के प्रशासनिक नेतृत्व में बदलाव हुआ है। नए बोर्ड के अन्य सदस्यों में सिराज डी. कापसी (बोहरा), थोडीयूर मुहम्मद कुंजू मौलवी, सजना फिरोज, जसीम सबाह सी, एमपी मुस्तफा फैजी, डॉ. अब्दुल मजीद स्वालाही और मदीना बेगम ए. शामिल हैं। बोर्ड के दो पद फिलहाल खाली रखे गए हैं। इन पर गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश का इंतजार किया जा रहा है। इस वजह से बोर्ड की संरचना को लेकर कानूनी प्रक्रिया का महत्व बना हुआ है।

पिछले वक्फ बोर्ड का कार्यकाल बाकी रहते हुआ पुनर्गठन

केरल में पिछला वक्फ बोर्ड तत्कालीन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार ने गठित किया था। बताया गया है कि उसके कार्यकाल के अभी चार साल बाकी थे। इसके बावजूद राज्य सरकार ने नए बोर्ड के गठन का फैसला किया है। पिछले बोर्ड के सदस्यों की योग्यता को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में एक याचिका लंबित थी। ऐसे में नए बोर्ड का गठन प्रशासनिक बदलाव के साथ-साथ कानूनी प्रक्रियाओं से भी जुड़ा हुआ है। सरकार का फैसला नए कानूनी प्रावधानों को लागू करने के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की व्यवस्था के तहत नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश के बाद की जानी हैं। वक्फ बोर्ड राज्य में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन, प्रबंधन और उनसे संबंधित मामलों की निगरानी करने वाली महत्वपूर्ण संस्था है। ऐसे में इसके नेतृत्व और संरचना में बदलाव का असर बोर्ड के कामकाज पर पड़ सकता है।

केरल में सत्ता में वापसी के बाद UDF का फैसला

केरल में यूडीएफ कांग्रेस के नेतृत्व वाला प्रमुख राजनीतिक गठबंधन है। इसमें कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) समेत कई दल शामिल हैं। मई 2026 के विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की जीत के बाद राज्य में गठबंधन की सत्ता में वापसी हुई। वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन नई सरकार के महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों में से एक है। IUML के नेता को चेयरपर्सन नियुक्त करने और पार्टी के विधायक को सदस्य बनाने से बोर्ड में गठबंधन के प्रमुख सहयोगी दल की भूमिका सामने आती है। हालांकि, इस नियुक्ति के राजनीतिक प्रभावों का आकलन बोर्ड के आगे के कामकाज और सरकार की नीतियों के आधार पर किया जा सकेगा।

कानूनी प्रावधानों के बीच बोर्ड की नई संरचना

नए वक्फ बोर्ड के गठन में सबसे महत्वपूर्ण पहलू दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति है। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, इन पदों को नए कानून के प्रावधानों के तहत भरा जाना है, लेकिन नियुक्ति की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर निर्भर करेगी। इससे स्पष्ट है कि बोर्ड के पुनर्गठन के बावजूद उसकी पूरी संरचना अभी तय नहीं हुई है। आने वाले समय में अदालत के आदेश और राज्य सरकार की आगे की कार्रवाई से इन रिक्त पदों को भरने की स्थिति स्पष्ट होगी।

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