हार्ट अटैक को बना दिया हत्या का मामला, कानपुर में 5 बेगुनाह काटते रहे जेल की सजा, कोर्ट ने किया बरी

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक बेहद विचित्र मामला सामने आया है। बता दें कि यहां पुलिस की बड़ी लापरवाही देखने को मिली। एक व्यक्ति की मौत के बाद पांच लोगों को उसका हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया, उन्होंने तीन साल तक जेल की सजा काटी, अब अदालत ने पांचों को निर्दोष बताया है।
कानपुर: हार्ट अटैक को समझा मर्डर, 5 बेगुनाह बरी

खबर विस्तार : -

Kanpur News: कानपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, हार्ट अटैक के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जिसके बाद पांच लोगों को इस केस में हत्यारा बताकर जेल भेज दिया गया। अब मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई है कि पांचों निर्दोष हैं। कोर्ट में कोई चश्मदीद गवाह या सीसीटीवी फुटेज नहीं मिला, जिससे यह साबित हो गया कि मौत दिल का दौरा पड़ने के कारण हुई। उन्हें अदालत ने बेकसूर बताते हुए बरी कर दिया है। पांचों ने तीन साल तक जेल की सजा काटी। इस कार्रवाई को पुलिस की बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।

ट्रांसपोर्ट भवन के लॉन में मिला संतोष का शव  

कानपुर में पुलिस की बड़ी लापरवाही देखने को मिली। पांच बेगुनाहों को हत्या के आरोप में जेल भेज दिया गया, जहां उन्होंने तीन साल तक हत्या के आरोपी के दाग लेकर जी रहे थे। अब कोर्ट ने उन्हें बेकसूर बताते हुए बरी कर दिया है। बता दें कि बाबूपुरवा के ट्रांसपोर्ट भवन में चौकीदार जितेंद्र उर्फ भाटे के साथ पल्लेदारी का काम करने वाले अशोक और इम्तियाज रहते थे। इसके साथ ही मुंशीपुरवा के रहने वाले संतोष उर्फ कलाकार भी उनके साथ मजदूरी करता था। उसका अपने परिवार से किसी कारण विवाद हुआ तो वह ट्रांसपोर्ट भवन में रहने के लिए चला गया। 31 अगस्त  2023 की सुबह ट्रांसपोर्ट भवन के लॉन में संतोष का शव पड़ा मिला। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। 

रिपोर्ट में मृतक का चेहरा नीला 

संतोष की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि उसके एक आंख पर चोट के निशान मिले। इसके बाद मृतक के भांजे नीरज ने हत्या की आशंका जताते हुए बाबूपुरवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई और शिकायत में जितेंद्र और अशोक को इसका जिम्मेदार बताया। इसके बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर जितेंद्र उर्फ भाटे, अशोक कुमार, इम्तियाज उर्फ छुछली, लालू उर्फ लाल सिंह और मिथुन को हत्या का आरोपी करार करते हुए जेल भेज दिया। इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जिसके मुताबिक पांचों पर लाठी से मारकर हत्या करने और शव को नीचे फेंकने का आरोप लगाया गया। वहीं अधिवक्ता ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या का कारण स्पष्ट नहीं था। हालांकि इसके चलते बिसरा सुरक्षित रखा गया था। इस दौरान हार्ट को भी सुरक्षित रखा गया, लेकिन उसकी जांच नहीं की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि उसका चेहरा नीला पड़ गया था और मौत की वजह साइनोसिस थी।

पोस्टमार्टम में खुला मौत का राज

जांच में सामने आया कि मृतक के शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो गई थी, जिसे मेडिकल की भाषा में साइनोसिस कहते हैं। इसके अलावा कोर्ट में कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिला। इसके साथ ही वहां लगे सीसीटीवी फुटेज में भी किसी को आते-जाते हुए नहीं देखा गया। हालांकि एक गवाह ने कहा कि इम्तियाज को ट्रांसपोर्ट भवन में जाते हुए देखा था, लेकिन इसके बाद वह सो गया। पुलिस के मुताबिक हार्ट की जांच होने के बाद रिपोर्ट में सामने आया कि उसके दोनों चैंबर फुल हो गए थे, जिससे उसे हार्ट अटैक आया था। जांच कर्ता ने कोर्ट में कहा कि संतोष की मौत दिल का दौरा पड़ने के कारण हुआ था, उसकी हत्या नहीं की गई थी। इसके बाद कोर्ट ने पांचो को निर्दोष बताते हुए रिहा कर दिया। बता दें कि इनमें से तीन लोगों को निर्णय आने के बाद जेल से रिहा किया गया, जबकि दो लोग पहले से ही जमानत पर बाहर थे।

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