16 साल तक करता रहा गवाह का इंतजार, आखिरकार कोर्ट में खुद ही कबूल लिया गुनाह

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति ने 16 साल तक कोर्ट के चक्कर काटने के बाद अभियुक्त ने खुद ही अपना गुनाह कबूल कर लिया।
16 साल तक करता रहा गवाह का इंतजार, आखिरकार कोर्ट में खुद ही कबूल लिया गुनाह

खबर विस्तार : -

Kanpur News: कानपुर से एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। एक व्यक्ति के खिलाफ साल 2010 में मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के कारण मुकदमा दर्ज किया गया था। बताया जा रहा है कि उसने 16 साल तक कोर्ट में गवाह का इंतजार किया, लेकिन इसके बाद भी जब कोई गवाह नहीं आया, तो उसने खुद ही गुनाह कबूल लिया। कोर्ट ने उसे छह महीने की परिवीक्षा अवधि पर रिहा कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने सख्त हिदायत दी कि इस दौरान वह किसी तरह का अपराध नहीं कर सकता है। 

सालों से काट रहा था कोर्ट के चक्कर

उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार बर्रा थाना क्षेत्र में 16 साल पहले गोरखपुर के रहने वाले इंद्रासन ने 9 जून 2010 को अपने दत्तक बेटे अमर सिंह के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप में कहा गया कि अमर की मारपीट से तंग आकर एक साल पहले ही वह बर्रा स्थित अपना मकान बेचकर गोरखपुर रहने चला गया। इसके बाद 9 जून को जब वापस लौटा तो टेंपो स्टैंड पर अमर ने उसे रोका और गाली देने लगा। आरोप है कि अमर ने धमकी देते हुए कहा कि यहां से चले जाओं नहीं तो जान से मार देंगे। इसके बाद उसने मारपीट की, इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने इंद्रासन को बचाया। बर्रा पुलिस ने चार्जशीट लगाते हुए 16 अगस्त 2013 को अमर के खिलाफ कोर्ट ने आरोप भी तय कर दिए। 

परिवीक्षा अवधि पर रिहा 

अभियोजन का कहना है कि अभी तक  उसने कोर्ट में एक भी गवाह पेश नहीं कर पाया है। अधिवक्ता कैलाश सैनी के मुताबिक अमर सिंह सालों से कोर्ट का चक्कर लगाकर थक गया था। उसने 16 साल तक गवाह का इंतजार किया, लेकिन जब कोई  गवाह नहीं आया, तो उसने खुद ही गुनाह कबूल लिया। कोर्ट ने उसे 20 हजार निजी मुचलके पर छह महीने की परिवीक्षा अवधि पर रिहा कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने सख्त हिदायत देते हुए कहा कि अगर प्रोबेशन के दौरान अभियुक्त ने किसी भी प्रकार की हिंसा करने की कोशिश की, तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी। इसके साथ ही मेरठ में कोर्ट ने एक हत्याकांड में कड़ा फैसला लेते हुए आरोपी पत्नी को दोषी बताया है और 20 हजार रुपये के अर्थदंड के साथ आजीवन कारावास की भी सजा सुनाई है। 

आजीवन कारावास की सजा

मेरठ के अपर जिला जज ने 9 साल पहले बाबूराम हत्याकांड के मामले में उसकी आरोपी पत्नी दीपा को सजा के तौर पर 20 हजार रुपये का आर्थिक दंड और आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दरअसल साल 2017 में मृतक के भाई ने मुकदमा दर्ज कराई थी कि बाबूराम की पत्नी दीपा ने अपने प्रेमी शिवम के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी। हत्या करने के बाद उसने शव को बोरे में भरकर कबाड़ के कमरे में छिपा दिया। 21 अक्टूबर को वादी ने इस बात की जानकारी पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच करनी शुरु कर दी। अपर जिला जज कोर्ट संख्या-3 के जज रितेश सचदेवा ने 9 साल से चल रहे इस केस में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी पत्नी को दोषी करार देते हुए दीपा को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। 

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