झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी रेलवे स्टेशन (Jhansi Railway Station) पर इन दिनों मुसाफिरों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है। स्टेशन परिसर और ट्रेनों में चोरों तथा टप्पेबाजों का हौसला इस कदर बुलंद हो चुका है कि उन्हें न तो खाकी का खौफ है और न ही तीसरी आंख यानी सीसीटीवी (CCTV) कैमरों का। ताजा मामला एक महिला यात्री से जुड़ा है, जिसका शातिर चोरों ने सचखंड एक्सप्रेस (Sachkhand Express) में चढ़ते समय चंद सेकेंडों के भीतर ही पूरा घर उजाड़ दिया। पीड़ित महिला के हाथ में टंगे हैंडबैग की चेन खोलकर चोरों ने करीब 15 लाख रुपये कीमत के सोने के आभूषण (Gold Jewelry) पार कर दिए। इस बड़ी वारदात के बाद जब पीड़ित परिवार पुलिस के पास पहुंचा, तो उन्हें मदद के बजाय टका सा जवाब और अजीबोगरीब नसीहतें सुनने को मिल रही हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, झांसी जनपद के गुरसराय इलाके के मऊ चौराहा डीआरसी चौक की रहने वाली नीलम घोष पत्नी संजय घोष अपनी बहू के साथ बीना में आयोजित एक शादी समारोह (Wedding Ceremony) में शामिल होने जा रही थीं। दोनों महिलाएं बीना जाने के लिए झांसी रेलवे स्टेशन (Jhansi Railway Station) पहुंची थीं। प्लेटफॉर्म पर जैसे ही सचखंड एक्सप्रेस (Sachkhand Express) आकर रुकी, कोच में चढ़ने के लिए यात्रियों के बीच आपाधापी मच गई। इसी भारी भीड़ का फायदा उठाकर वहां पहले से घात लगाए बैठे एक शातिर चोर ने नीलम घोष के हाथ में लटके पर्स की चेन बेहद सफाई से खोल दी और भीतर रखे लगभग 100 ग्राम वजनी सोने के आभूषण (Gold Jewelry) लेकर रफूचक्कर हो गया।
भीड़ से जूझते हुए जब महिला किसी तरह ट्रेन के भीतर दाखिल हुई और अपनी सीट पर बैठी, तो उसकी नजर अचानक खुले हुए हैंडबैग पर पड़ी। बैग के अंदर से गहनों का डिब्बा गायब देखकर महिला के पैरों तले जमीन खिसक गई। पल भर में ही शादी की सारी खुशियां चीख-पुकार और आंसुओं में बदल गईं। पीड़िता ने तुरंत कोच में मौजूद सहयात्रियों को इसकी जानकारी दी और आनन-फानन में उतरकर राजकीय रेलवे पुलिस यानी जीआरपी (GRP) को लिखित तहरीर देकर कार्रवाई की गुहार लगाई।
पीड़ित महिला नीलम घोष ने बताया कि यह सनसनीखेज वारदात बीते 13 अप्रैल को हुई थी। घटना के दिन से ही वह और उनका परिवार लगातार झांसी रेलवे स्टेशन (Jhansi Railway Station) के जीआरपी थाने के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पुलिसिया सिस्टम की सुस्ती खत्म होने का नाम नहीं ले रही। हद तो तब हो गई जब शनिवार, 16 मई को भी पीड़िता इसी सिलसिले में दोबारा जीआरपी (GRP) दफ्तर पहुंची, लेकिन वहां मौजूद अधिकारियों ने सांत्वना का एक शब्द तक नहीं बोला। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस केस दर्ज कर चोरों को तलाशने के बजाय उल्टा उन्हें ही नसीहतें दे रही है। जीआरपी (GRP) के कारिंदों ने महिला से यहाँ तक कह दिया कि 'सफर में इतने महंगे जेवरात लेकर चलने की क्या जरूरत थी? अब चोर का मिलना बहुत मुश्किल है।'
पुलिस के इस अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के बाद अब रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि यदि जीआरपी (GRP) का काम सिर्फ मोबाइल चोरों को दबोचना या अवैध शराब पकड़ना ही रह गया है, तो इतनी बड़ी चोरियों पर लगाम कौन लगाएगा? रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के नाम पर जो करोड़ों रुपये के सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए गए हैं, वे ऐसी वारदातों के समय सफेद हाथी क्यों साबित होते हैं? क्या पुलिस सचमुच काम नहीं करना चाहती या फिर अपराधियों को खाकी का कोई डर ही नहीं बचा है?
फिलहाल, इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि झांसी रेलवे स्टेशन (Jhansi Railway Station) से यात्रा करते समय यात्रियों को अपनी सुरक्षा खुद ही करनी होगी। स्टेशन पर टप्पेबाज पूरी तरह सक्रिय हैं, इसलिए सफर के दौरान 'जागते रहिए' और सावधान रहिए।
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