झांसी रेल मंडल में बेडरोल चोरी का खामियाजा अटेंडेंट भुगत रहे, यात्रियों की छोटी चोरी से बिगड़ रहा कर्मचारियों का बजट
खबर सार :-
झांसी रेल मंडल की ट्रेनों में यात्रियों द्वारा बेडरोल चोरी के कारण करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। रेलवे की वसूली का भार ठेकेदारों के जरिए कोच अटेंडेंट के वेतन से काटा जा रहा है। चार साल में 2 लाख से अधिक बेडरोल गायब हुए।
खबर विस्तार : -
झांसी: रेलवे यात्रियों को आरामदायक सफर उपलब्ध कराने के लिए ट्रेनों में कंबल, चादर, तकिया और तौलिया जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। लेकिन कुछ यात्रियों की गलत आदतों और चोरी की घटनाओं का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ रहा है जो दिन-रात यात्रियों की सेवा में लगे रहते हैं। झांसी रेल मंडल में पिछले चार वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में बेडरोल सामान यात्रियों द्वारा चोरी किए जाने का मामला सामने आया है, जिसका आर्थिक बोझ अंततः कोच अटेंडेंट के सीमित वेतन पर पड़ रहा है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2022 से 2026 के बीच झांसी मंडल की ट्रेनों से दो लाख से अधिक बेडरोल सामान गायब हुए हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब 2 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस नुकसान की भरपाई सीधे रेलवे के खाते से नहीं होती, बल्कि इसकी वसूली ठेकेदारों से की जाती है और बाद में ठेकेदार यह रकम अटेंडेंट के वेतन से काट लेते हैं।
यात्रियों की चोरी, कर्मचारियों पर आर्थिक मार
ट्रेन में यात्रा शुरू होने से पहले रेलवे के ठेकेदार द्वारा कोच अटेंडेंट को बेडरोल सामान गिनती के साथ उपलब्ध कराया जाता है। यात्रा समाप्त होने के बाद जब सामान वापस लिया जाता है तो कम पाए जाने पर उसकी कीमत रेलवे द्वारा ठेकेदार के रनिंग बिल से काट ली जाती है। इसके बाद ठेकेदार इस नुकसान की भरपाई कोच अटेंडेंट से करता है। ऐसे में यात्रियों द्वारा की गई छोटी-सी चोरी का असर उन कर्मचारियों पर पड़ता है जिनका वेतन पहले से ही सीमित होता है। कई बार एक ही यात्रा में कई सामान गायब हो जाते हैं और इसकी कटौती अटेंडेंट के महीने भर के खर्च को प्रभावित कर देती है।
चार साल में हजारों तौलिये और चादरें गायब
झांसी मंडल में चोरी हुए सामान में सबसे ज्यादा संख्या फेस टॉवल की है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में करीब 79,859 तौलिये यात्रियों द्वारा ले जाए गए। इसके अलावा 51 हजार से अधिक बेडशीट भी गायब हुई हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, छोटे आकार और आसानी से बैग में रखे जाने के कारण तौलियों की चोरी सबसे अधिक होती है। कई यात्री इसे मामूली बात समझ लेते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में होने वाली ऐसी घटनाएं रेलवे और कर्मचारियों दोनों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बनती हैं।
चादर और तौलिये की तय है कीमत
रेलवे नियमों के अनुसार, सामान गायब होने पर उसकी कीमत निर्धारित है। एक बेडशीट गायब होने पर ठेकेदार से करीब 188 रुपये और एक तौलिया गायब होने पर करीब 47 रुपये की वसूली की जाती है। पिछले चार वर्षों में रेलवे ने बेडरोल चोरी के मामले में ठेकेदारों से लगभग 2.06 करोड़ रुपये की वसूली की है। हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि इस वसूली का अंतिम भार अक्सर कोच अटेंडेंट पर डाल दिया जाता है।
रेलवे ने यात्रियों से की जिम्मेदारी निभाने की अपील
झांसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि रेलवे द्वारा यात्रा से पहले कोच अटेंडेंट को गिनती के अनुसार बेडरोल उपलब्ध कराए जाते हैं। यात्रा के बाद सामान कम मिलने पर उसकी लागत ठेकेदार के बिल से काटी जाती है। उन्होंने कहा कि रेलवे यात्रियों को बेहतर और आरामदायक यात्रा सुविधा देने के लिए यह व्यवस्था करता है, लेकिन कुछ यात्रियों द्वारा इसका गलत इस्तेमाल किया जाता है, जो उचित नहीं है।
व्यवस्था में सुधार की जरूरत
बेडरोल चोरी की घटनाएं केवल रेलवे के संसाधनों का नुकसान नहीं करतीं, बल्कि इससे उन कर्मचारियों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है जो यात्रियों की सुविधा के लिए जिम्मेदार होते हैं। कोच अटेंडेंट पहले ही लंबे समय तक ड्यूटी करते हैं, ऐसे में वेतन से होने वाली कटौती उनके आर्थिक हालात को और मुश्किल बना देती है। जरूरत इस बात की है कि रेलवे यात्रियों में जागरूकता बढ़ाए और चोरी रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करे, ताकि यात्रियों की सुविधा के लिए दी गई सेवाओं का नुकसान न हो और इसकी कीमत किसी निर्दोष कर्मचारी को न चुकानी पड़े।
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