Mukhyamantri Gram Parivahan Yojana Jhansi की सुस्त शुरुआत: मंडल में 48 में से केवल 2 बसें ही उतरीं सड़क पर
खबर सार :-
मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत झांसी में बसों का संचालन ठप। 48 में से सिर्फ 2 बसें सड़क पर उतरीं। जानें क्या है बस ऑपरेटरों की समस्या और परिवहन विभाग का अगला कदम।
खबर विस्तार : -
झांसी: उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना', जिसका उद्देश्य हर गांव को शहर से जोड़ना और ग्रामीणों की राह आसान करना था, फिलहाल जिले में कछुआ चाल चलती नजर आ रही है। परिवहन विभाग की तमाम कोशिशों और रूट निर्धारण के बावजूद, निजी बस ऑपरेटरों की बेरुखी इस योजना के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रही है।
झांसी डिपो और रोडवेज विभाग ने इस योजना के तहत कुल 48 मिनी बसों के संचालन का लक्ष्य रखा था। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी की गई और बकायदा रूट भी आवंटित कर दिए गए। लेकिन जब इन बसों को सड़क पर उतारने और कागजात जमा करने की बारी आई, तो सन्नाटा पसर गया। विभाग द्वारा निर्धारित 28 अप्रैल की समय सीमा बीत जाने के बाद भी स्थिति यह है कि 48 में से केवल 2 बसें ही अब तक सड़क पर उतर पाई हैं।
ब्लॉकवार आवेदनों का गणित
योजना के तहत विभिन्न ब्लॉकों से आए आवेदनों पर नजर डालें तो स्थिति काफी असंतुलित रही है:
- मोंठ ब्लॉक: सबसे अधिक 25 आवेदन
- गुरसराय: 08 आवेदन
- बामोर: 10 आवेदन
- चिरगांव: 02 आवेदन
- मऊरानीपुर व बंगरा: क्रमशः 01 और 02 आवेदन
बबीना और बड़ागांव: हैरानी की बात यह है कि इन दोनों ब्लॉकों से एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ।
क्या आ रही हैं चुनौतियां?
परिवहन विभाग ने सभी 48 आवेदकों को पत्र भेजकर बसें और उनके दस्तावेज झांसी डिपो में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। तकनीकी रूप से जो दो बसें संचालित की भी गई हैं, उनमें अभी तक व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) सक्रिय नहीं हो सका है, जिसके कारण विभाग इन्हें ऑनलाइन ट्रैक करने में असमर्थ है।
निजी संचालकों की ओर से हो रही देरी के पीछे वित्तीय और लॉजिस्टिक कारण बताए जा रहे हैं। क्षेत्रीय प्रबंधक (रोडवेज), संतोष कुमार के अनुसार, कई ऑपरेटरों ने बुकिंग और फाइनेंस के कागजात तो दिखाए हैं, लेकिन बसों की डिलीवरी न मिलने का हवाला देकर और समय की मांग की है। फिलहाल विभाग इन ऑपरेटरों को एक और मौका दे रहा है, लेकिन यदि जल्द ही बसों की संख्या नहीं बढ़ी, तो दूर-दराज के गांवों को मुख्य धारा से जोड़ने का मुख्यमंत्री का यह सपना कागजों तक ही सीमित रह सकता है। अब देखना यह होगा कि रियायत मिलने के बाद निजी संचालक कितनी जल्दी अपनी सेवाएं शुरू करते हैं।
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