सांसद दामोदर अग्रवाल ने लोकतंत्र सेनानी दयाराम मेठानी से की मुलाकात, आपातकाल और विभाजन की स्मृतियों पर हुई चर्चा

खबर सार :-

अग्रवाल ने दयाराम मेठानी के राजनीतिक, सामाजिक और पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान को अनुकरणीय बताते हुए उनका सम्मान किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के अनुभवों को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों और संगठन की परंपराओं को आगे बढ़ाया जा सके।
सांसद दामोदर अग्रवाल ने लोकतंत्र सेनानी दयाराम मेठानी से की मुलाकात, आपातकाल और विभाजन की स्मृतियों पर हुई चर्चा

खबर विस्तार : -

भीलवाड़ा: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, लोकतंत्र सेनानी एवं वरिष्ठ पत्रकार दयाराम मेठानी से शनिवार को सांसद दामोदर अग्रवाल ने उनके निवास पर शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात केवल औपचारिक अभिवादन तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोकतंत्र, संगठन, राष्ट्र निर्माण और राजनीतिक मूल्यों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा का अवसर बनी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच लंबे अनुभवों और विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

सांसद प्रवक्ता विनोद झुरानी ने बताया कि सांसद दामोदर अग्रवाल ने दयाराम मेठानी के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के साथ-साथ उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और संगठन के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता पार्टी की अमूल्य धरोहर हैं। उनका अनुभव और संघर्ष नई पीढ़ी के कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती केवल वर्तमान कार्यकर्ताओं से नहीं, बल्कि उन वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन से भी बनी रहती है जिन्होंने वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में पार्टी और राष्ट्रहित के लिए कार्य किया।

मुलाकात के दौरान दयाराम मेठानी ने भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय की अपनी स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि विभाजन केवल सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि लाखों परिवारों के विस्थापन, पीड़ा और संघर्ष का दौर भी था। उन्होंने उस समय के सामाजिक और मानवीय संकटों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने उस दौर में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, जिनकी यादें आज भी मन को व्यथित कर देती हैं।

चर्चा के दौरान देश में लगाए गए आपातकाल का विषय भी प्रमुखता से उठा। दयाराम मेठानी ने बताया कि लोकतंत्र की रक्षा के संघर्ष में उन्हें लगभग 19 महीने तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने विचारों और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। उनके अनुसार, लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

सांसद दामोदर अग्रवाल ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि उस समय लोकतंत्र सेनानियों ने जिस साहस और त्याग का परिचय दिया, उसी के कारण आज देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल कानूनों से नहीं होती, बल्कि उन लोगों के संकल्प और बलिदान से होती है जो कठिन समय में भी सत्य और स्वतंत्रता के पक्ष में खड़े रहते हैं।

इस अवसर पर पूर्व पार्षद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता शंकर मेठानी, सांसद प्रवक्ता विनोद झुरानी, कल्पेश चौधरी सहित भाजपा के कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने दयाराम मेठानी के लंबे सार्वजनिक जीवन, लोकतंत्र की रक्षा में उनके योगदान और सामाजिक कार्यों की सराहना की।

यह मुलाकात लोकतंत्र सेनानियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ संगठन की वैचारिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश भी देती नजर आई। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने कहा कि ऐसे वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और संघर्ष समाज तथा संगठन दोनों के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेंगे।

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