शाहपुरा में 1008 पार्श्वनाथ भगवान की नवीन प्रतिमा हुई विराजमान, भव्य शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब

खबर सार :-

1008 पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा स्थापना के पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से णमोकार मंत्र का जाप किया, जिससे मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। इसके बाद प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य सेठी परिवार को प्राप्त हुआ, जो इस आयोजन के पुण्यार्जक परिवार भी रहे।
शाहपुरा में 1008 पार्श्वनाथ भगवान की नवीन प्रतिमा हुई विराजमान, भव्य शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब

खबर विस्तार : -

शाहपुरा: शाहपुरा नगरी गुरुवार को जैन धर्म की आस्था, अनुशासन और आध्यात्मिक गरिमा का केंद्र बन गई, जब सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में नवनिर्मित जैन मंदिर में 1008 पार्श्वनाथ भगवान की नवीन जिन प्रतिमा को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नवीन वेदी पर विराजमान कराया गया। इस ऐतिहासिक और पुण्यमयी अवसर पर नगर भक्ति, श्रद्धा और उत्साह के रंग में रंगा दिखाई दिया। दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों, भव्य शोभायात्रा, अभिषेक और महाआरती के माध्यम से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।

शोभायात्रा में पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः वेंदो के मंदिर से हुई, जहां नवीन जिन प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक पालकी में विराजमान किया गया। भगवान के जयघोष और णमोकार मंत्र की मंगलध्वनि के बीच निकली भव्य शोभायात्रा में समाज के सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। पीले मंदिर वस्त्र धारण किए 10 श्रावकों ने पालकी को अपने कंधों पर उठाया, जबकि छह श्रावकों ने पाषाण निर्मित 1008 पार्श्वनाथ भगवान की नवीन प्रतिमा को विशेष वाहन पर विराजमान कर शोभायात्रा में शामिल किया।

शोभायात्रा वेंदो का मंदिर, कालाभाटा मंदिर, बालाजी की छतरी, सदर बाजार, त्रिमूर्ति चौराहा, नया बाजार और कोठार मोहल्ला होते हुए नवनिर्मित जैन मंदिर पहुंची। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया और पूरा वातावरण "पार्श्वनाथ भगवान की जय" के जयघोष से गूंज उठा।

दिगंबर जैन परंपरा और शास्त्रीय मर्यादा के साथ अभिषेक

नवनिर्मित मंदिर पहुंचने पर प्रतिष्ठाचार्य पंडित लादूलाल जैन के सानिध्य में प्रतिमा स्थापना का मुख्य अनुष्ठान प्रारंभ हुआ। नवीन वेदी और प्रतिमा का शुद्धिकरण करने के बाद शुभ मुहूर्त में वेदी पर केसर से स्वास्तिक अंकित कर विधिपूर्वक 1008 पार्श्वनाथ भगवान की मनोहारी प्रतिमा विराजमान कराई गई। श्रद्धालुओं ने प्रतिमा के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। उल्लेखनीय है कि इस प्रतिमा का पंचकल्याणक महोत्सव मध्यप्रदेश के गुना में संपन्न हुआ था।

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि दिगंबर जैन परंपरा और शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार भगवान का अभिषेक केवल शुद्ध जल से किया गया। जैन धर्म में जलाभिषेक आत्मशुद्धि, निर्मलता और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मन के विकारों को दूर कर आत्मा को पवित्र बनाने का आध्यात्मिक संदेश भी देता है।

इसके बाद समाज के श्रावकों ने 108 कलशों से भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा की। जैसे-जैसे कलशों से जलधारा भगवान पर अर्पित होती गई, वैसे-वैसे मंदिर परिसर में भक्ति और शांति का वातावरण और अधिक गहराता गया। उपस्थित श्रद्धालु पूरे समय भक्तिभाव में लीन दिखाई दिए।

श्रद्धालुओं ने लिया उत्साहपूर्वक भाग

सायंकाल 48 दीपकों से भव्य भक्तामर महाआरती का आयोजन किया गया। दीपों की स्वर्णिम आभा, भक्तामर स्तोत्र की गूंज और मंत्रोच्चार ने पूरे मंदिर परिसर को दिव्यता से आलोकित कर दिया। महाआरती के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर नजर आए।

समाज अध्यक्ष आनंद सेठी ने कहा कि नवीन जिन प्रतिमा की स्थापना जैन समाज के लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में समाज के सभी सदस्यों के सहयोग की सराहना करते हुए पुण्यार्जक परिवार का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में संस्कार, समर्पण और एकता की भावना को मजबूत करते हैं।

समाज के महेंद्र जैन ने बताया कि भगवान की पालकी यात्रा में पूरे नगर ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और हर मार्ग पर श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। वहीं नवरतन जैन ने कहा कि यह आयोजन केवल प्रतिमा स्थापना तक सीमित नहीं था, बल्कि जैन संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों का जीवंत उत्सव बन गया।

उन्होंने कहा कि गुरुवार का यह दिन शाहपुरा के जैन समाज के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। नवीन मंदिर में 1008 पार्श्वनाथ भगवान की स्थापना आने वाली पीढ़ियों के लिए श्रद्धा, संयम और धर्म साधना का प्रेरणास्रोत बनेगी। भगवान पार्श्वनाथ की शांत, करुणामयी और तपस्वी प्रतिमा श्रद्धालुओं को अहिंसा, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का संदेश देती रहेगी।

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