लखनऊ अग्निकांड के बाद झांसी में प्रशासन सख्त, 8 कोचिंग सेंटर सील, सुरक्षा मानकों की व्यापक जांच शुरू

खबर सार :-

झांसी विकास प्राधिकरण की टीम ने पुलिस बल के साथ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया। अधिशासी अभियंता के नेतृत्व में सहायक अभियंताओं और अवर अभियंताओं ने भवनों के मानचित्रों तथा सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें सील कर दिया गया।
लखनऊ अग्निकांड के बाद झांसी में प्रशासन सख्त, 8 कोचिंग सेंटर सील, सुरक्षा मानकों की व्यापक जांच शुरू

खबर विस्तार : -

झांसी: लखनऊ में हुए भीषण एवं हृदय विदारक अग्निकांड के बाद प्रदेशभर में कोचिंग संस्थानों और सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। इसी क्रम में झांसी जिला प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाते हुए शहर में संचालित कोचिंग संस्थानों के खिलाफ व्यापक जांच अभियान शुरू कर दिया है। झांसी विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने महानगर में संचालित आठ कोचिंग सेंटरों को नियमों के उल्लंघन के चलते सील कर दिया है।

सील किए गए संस्थानों में कुमार आईएएस, केजीएन स्टडी, विद्यापीठ कोचिंग क्लासेस, कॉमर्स क्लासेज, एकलव्य क्लासेस, मोशन क्लासेस, महिंद्रा क्लासेस तथा आकाश कोचिंग शामिल हैं। प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार ये संस्थान या तो बिना मानचित्र स्वीकृत कराए संचालित हो रहे थे अथवा स्वीकृत मानचित्र के विपरीत गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।

प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संस्थान को नियमों की अनदेखी कर संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे निरीक्षण अभियान जारी रहेंगे और दोषी पाए जाने वाले संस्थानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इधर शिक्षा विभाग ने भी सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की तैयारी कर ली है। संयुक्त शिक्षा निदेशक राजू राणा सिंह ने जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देश दिए हैं कि दो दिनों के भीतर विशेष निरीक्षण अभियान चलाकर असुरक्षित कोचिंग संस्थानों की पहचान की जाए और आवश्यक कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी बेसमेंट में संचालित कोचिंग संस्थान को अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अतिरिक्त सभी कोचिंग संस्थानों का उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकरण अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी राजकिशोर राय ने बताया कि हाल ही में किए गए निरीक्षण के दौरान अधिकांश कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरियां बंद मिली थीं। ऐसे संस्थानों को अग्नि सुरक्षा उपकरण स्थापित करने और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दमकल विभाग की टीम ने एक दर्जन से अधिक लाइब्रेरियों का निरीक्षण करने का प्रयास किया, लेकिन अधिकांश स्थानों पर ताले लगे मिले।

बुधवार को कोचिंग और लाइब्रेरी संचालकों के साथ आयोजित बैठक में उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जब तक सभी आवश्यक अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाएं पूरी नहीं कर ली जातीं, तब तक संस्थान संचालित नहीं किए जाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

जिलाधिकारी गौरांग राठी ने कहा कि बच्चों के भविष्य और उनकी जान दोनों से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग, झांसी विकास प्राधिकरण, फायर विभाग और अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त टीम जिले के उन सभी भवनों का निरीक्षण करेगी जहां कोचिंग सेंटर, नर्सिंग होम या अन्य सार्वजनिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी कोचिंग संस्थान को बंद किया जाता है तो यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जिन छात्रों ने अग्रिम रूप से फीस जमा की है, उन्हें उनकी राशि वापस मिले। प्रशासन छात्रों और अभिभावकों के हितों की भी रक्षा करेगा।

उधर सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत जिला जेल में भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जेल कर्मचारियों और बंदियों को आग लगने की स्थिति में बचाव और नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी गई। उन्हें अग्निशमन यंत्रों के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। प्रत्येक बैरक के बाहर बालू से भरी बाल्टियां रखवाई गई हैं।

प्रशिक्षण के दौरान लकड़ी में आग लगने पर पानी का उपयोग करने, गैस से लगी आग पर गीला कंबल डालने तथा प्लास्टिक या विद्युत उपकरणों में आग लगने की स्थिति में अग्निशमन यंत्रों का प्रयोग करने के तरीके विस्तार से बताए गए। प्रशासन का उद्देश्य आपदा की स्थिति में जनहानि को न्यूनतम करना और लोगों को सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना है।

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