चाकसू: देवनारायण मंदिर की कलश यात्रा में कीचड़ से गुजरे श्रद्धालु, ग्रामीणों ने उठाई सड़क और जल निकासी की मांग

खबर सार :-

जयपुर के चाकसू स्थित मंडालिया मैदा गांव में श्री देवनारायण भगवान मंदिर की कलश यात्रा श्रद्धा के साथ निकाली गई, लेकिन बदहाल सड़क, जलभराव और कीचड़ ने श्रद्धालुओं की राह मुश्किल बना दी। ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की मांग की।
चाकसू: देवनारायण मंदिर की कलश यात्रा में कीचड़ से गुजरे श्रद्धालु, ग्रामीणों ने उठाई सड़क और जल निकासी की मांग

खबर विस्तार : -

चाकसू: जयपुर जिले के चाकसू उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत मंडालिया मैदा में शुक्रवार को श्री देवनारायण भगवान मंदिर की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत भव्य कलश यात्रा श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ निकाली गई। परम पूज्य श्री 1008 श्री जोधानंद जी महाराज के मंदिर से शुरू हुई इस यात्रा में श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री बालकानंद जी महाराज के सान्निध्य में हजारों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भाग लिया। भगवान देवनारायण के जयकारों और भजनों से पूरा गांव भक्तिमय माहौल में सराबोर रहा।

हालांकि, धार्मिक आस्था के इस भव्य आयोजन के बीच गांव की मूलभूत सुविधाओं की बदहाल तस्वीर भी सामने आई। कलश यात्रा के मार्ग पर कई स्थानों पर जलभराव और कीचड़ होने से श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को फिसलन भरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ा, जिससे आयोजन की भव्यता के बीच व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हुए।

श्रद्धा और उत्साह के साथ निकली भव्य कलश यात्रा

कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश रखकर मंगल गीत गाते हुए हिस्सा लिया। पुरुष, युवा और बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुए। यात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से होती हुई श्री देवनारायण भगवान मंदिर पहुंची, जहां ध्वज पूजन सहित विभिन्न वैदिक अनुष्ठान संपन्न हुए। मार्ग में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं के लिए दो दिवसीय भंडारे की भी व्यवस्था की है। शनिवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा का मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसके बाद विशाल महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा।

कीचड़ और जलभराव ने बढ़ाई श्रद्धालुओं की परेशानी

भव्य धार्मिक आयोजन के बावजूद गांव की सड़कें श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बनीं। कलश यात्रा जिस मार्ग से निकली, वहां कई स्थानों पर पानी जमा था और कीचड़ फैला हुआ था। सिर पर कलश लेकर चल रही महिलाओं को सावधानी से आगे बढ़ना पड़ा, जबकि कई बुजुर्ग और अन्य श्रद्धालु एक-दूसरे का सहारा लेकर यात्रा पूरी करते नजर आए। ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े आयोजन की जानकारी पहले से होने के बावजूद संबंधित मार्गों की सफाई, जल निकासी और आवश्यक मरम्मत की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। यदि समय रहते तैयारी कर ली जाती तो श्रद्धालुओं को इस कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता।

बरसात में हर साल होती है यही समस्या

स्थानीय लोगों के अनुसार बारिश के मौसम में गांव के कई मार्गों पर जलभराव और कीचड़ की समस्या हर वर्ष सामने आती है। इससे न केवल धार्मिक आयोजन प्रभावित होते हैं, बल्कि रोजमर्रा का आवागमन भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और किसानों को नियमित रूप से इन समस्याओं से जूझना पड़ता है। उनका मानना है कि यदि समय पर जल निकासी की व्यवस्था और सड़कों का रखरखाव किया जाए तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।

श्मशान घाट का रास्ता भी बदहाल

ग्रामीणों ने गांव के श्मशान घाट तक जाने वाले मार्ग की खराब स्थिति पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि बरसात के दौरान इस रास्ते पर भी पानी भर जाता है और कीचड़ के कारण अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील समय में भी लोगों को भारी कठिनाई उठानी पड़ती है। ग्रामीणों के अनुसार इस समस्या की जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उनका कहना है कि श्मशान घाट तक जाने वाला मार्ग गांव की सबसे महत्वपूर्ण मूलभूत सुविधाओं में शामिल है और इसकी अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कार्रवाई की मांग

कलश यात्रा के दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का भी ध्यान आकर्षित किया। ग्रामीणों का कहना है कि धार्मिक आयोजन गांव की पहचान होते हैं और ऐसे अवसरों पर यदि रास्ते बदहाल मिलें तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की कि गांव के मुख्य मार्गों, श्री देवनारायण मंदिर तक जाने वाले रास्ते और श्मशान घाट मार्ग का शीघ्र निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराई जाए। साथ ही प्रभावी जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए ताकि बरसात के दौरान जलभराव और कीचड़ की समस्या से स्थायी राहत मिल सके।

मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा का मुख्य आयोजन

आयोजन समिति के अनुसार शनिवार को श्री देवनारायण भगवान की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा का मुख्य कार्यक्रम वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न होगा। कार्यक्रम में संत-महात्माओं, विभिन्न सामाजिक संगठनों और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इसके बाद विशाल भंडारा और महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान तभी पूर्ण होगा, जब श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध हों। अब गांववासियों की नजरें प्रशासन, ग्राम पंचायत और जनप्रतिनिधियों पर हैं कि वे सड़क, जल निकासी और साफ-सफाई जैसी समस्याओं के समाधान के लिए कब तक ठोस कदम उठाते हैं।

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