गाजीपुर शस्त्र लाइसेंस जांच: माफिया मुख्तार अंसारी और सांसद अफजाल अंसारी के करीबियों पर कसा शिकंजा, पांच मुकदमे दर्ज

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में माफिया मुख्तार अंसारी और सांसद अफजाल अंसारी के शस्त्र लाइसेंसों की जांच में बड़ा खुलासा, पांच नए अभियोग दर्ज।
गाजीपुर शस्त्र लाइसेंस जांच: माफिया मुख्तार अंसारी और सांसद अफजाल अंसारी के करीबियों पर कसा शिकंजा, पांच मुकदमे दर्ज

खबर विस्तार : -

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब गाजीपुर जिले में माफिया मुख्तार अंसारी और उसके आपराधिक गिरोह से जुड़े लोगों के हथियारों के लाइसेंसों (Ghazipur Arms License Investigation) की पोल खुली। पुलिस विभाग की ओर से सामने आए ताजा दस्तावेजों के मुताबिक, इस मामले में कुल पांच मुकदमे दर्ज किए गए हैं। यह कार्रवाई शासन के सख्त निर्देशों के बाद शुरू की गई थी, जिसके तहत हथियारों के भौतिक सत्यापन का काम व्यापक स्तर पर चलाया गया। जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनमें सरकारी दस्तावेजों के गायब होने से लेकर फर्जी पतों पर लाइसेंस बनवाने तक के गंभीर आरोप शामिल हैं।

तीन चरणों में चला हथियारों के सत्यापन का महाअभियान

पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईजी की देखरेख में यह पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। प्रशासन ने इस जांच को कुल तीन स्पष्ट भागों में बांटा था। पहले चरण में माफिया मुख्तार अंसारी और उसके परिवार के पांच सदस्यों के पास मौजूद हथियारों की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया (Ghazipur Arms License Investigation) गया। दूसरे चरण में आईएस-191 गैंग के ग्यारह सहयोगियों और सदस्यों की सूची खंगाली गई। वहीं तीसरे और सबसे संवेदनशील चरण में उन सत्ताईस मामलों को परखा गया, जिनमें आरोप है कि बिना जिला मजिस्ट्रेट की विधिवत अनुमति के मिलीभगत करके फर्जी तरीके से लाइसेंस जारी किए गए थे। कुल मिलाकर अस्सी से ज्यादा हथियारों की कागजी और भौतिक पड़ताल की गई।

कार्यालय से गायब हुईं मूल पतरियां और कागजात

जब प्रशासनिक टीम ने फाइलों की गहराई से छानबीन शुरू की, तो कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। कई मामलों में लाइसेंस से जुड़ी मूल पत्रावलियां और हथियारों के खरीद-फरोख्त से जुड़े जरूरी कागजात जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के रिकॉर्ड रूम से ही गायब मिले। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई कि इन दस्तावेजों को सुनियोजित तरीके से इसलिए गायब कराया गया ताकि हथियारों के असली इस्तेमाल को छिपाया जा सके। इसके अलावा एक अन्य मामले में यह भी पता चला कि एक व्यक्ति ने अपना असली ठिकाना छिपाकर पूरी तरह से फर्जी पते पर हथियार का लाइसेंस हासिल कर लिया था, जिसमें स्थानीय स्तर पर तैनात अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई।

एसआईटी का गठन और आगे की कठोर कार्रवाई

इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने मामले की तह तक जाने के लिए विशेष अनुसंधान दल यानी एसआईटी का गठन कर दिया है। गाजीपुर नगर के अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में यह विशेष टीम हर एक पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। इसमें न सिर्फ लाइसेंस धारकों बल्कि उस दौर में पटल पर तैनात रहे लिपिकों और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को भी खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का साफ कहना है कि इस षड्यंत्र में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून का शिकंजा कसने में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। प्रशासन का यह अभियान अभी थमा नहीं है और बाकी बचे लाइसेंसों की फेहरिस्त पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।

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